सेक्स-चैट
दिन - १
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रौड: हलो
मैं: हाय
रौड: कैसी हो?
मैं: बढिया और आप?
रौड: ऊपरवाले की कृपा है।
मैं: अच्छा है।
रौड: और बताओ, कैसा चल रहा है?
मैं: चलना क्या है, सब ठीक ही है।
रौड: किस शहर से हो आप?
मैं: कटिहार, आप जानते हैं कहाँ है?
रौड: हाँ, मैंने अपनी स्कूल की पढ़ाई पास के सहरसा जिला से की है।
मैं: आप बिहारी हैं?
रौड: नहीं, गोरखपुर का हूँ। पिताजी की नौकरी थी वहाँ, बैंक में अधिकारी थे। तुम कटिहार की ही हो
मैं: हाँ, आप क्या करते हैं?
रौड: सेल्स में हूँ, एक बड़ी दवा कम्पनी में। तुम क्या करती हो?
मैं: पढती हूँ, बी.ए. सेकेन्ड ईयर में।
रौड: अच्छा है, क्या उम्र है तुम्हारी?
मैं: १९ और आपकी?
रौड: ४१... मेरे लिए तो तुम बच्ची हो। तुमसे चैट करना चाहिए क्या?
मैं: क्यों, ऐसी क्या बात है... जो मुझसे नहीं की जा सकती?
रौड: मेरी बेटी का १७वाँ जन्मदिन चार दिन पहले था।
मैं: अच्छा, बीलेटेड हैप्पी बर्थ-डे उसको बोल दीजिएगा मेरी तरफ़ से।
रौड: ठीक है, पर तुम्हारा परिचय क्या दुँगा?
मैं: कह दीजिएगा कि उसकी दीदी की तरफ़ से है यह बधाई।
रौड: अगर तुम उसकी दीदी बनोगी तो फ़िर हम चैट कैसे करेंगे?
मैं: क्यों???
रौड: मेरी बेटी की दीदी... मतलब मेरी बेटी... तो फ़िर इस साईट पर हम मिले क्यों?
मैं: हा हा हा, सो तो है..., फ़िर आप जैसा कहें?
रौड: चलो आज फ़िर हम सेक्स नहीं करेंगे, पर कुछ शरारती बातें तो हो सकती हैं?
मैं: क्यों नहीं, मैं वैसे भी बहुत शरारती हूँ।
रौड: अच्छा? सबसे खतरनाक शरारत क्या की हो आजतक?
मैं: मुझे पैन्टी पहनना पसन्द नहीं है, खासकर गर्मी में। तो मैं अक्सर बाजार या कौलेज सिर्फ़ स्कर्ट पहन कर चली जाती हूँ।
रौड: ये नया ट्रेन्ड निकला है लगता है आजकल, मेरी बेटियों को भी सिर्फ़ बाहर जाते समय ही पैन्टी याद आता है। बाहर से घर
आने के बाद उनकी पैन्टी भी बाथरूम की खुँटी पर टंग जाती है।
मैं: अच्छा... कितनी बेटियाँ हैं? परिवार में कितने लोग हैं।
रौड: दो बेटियाँ हैं, १७ और १५ साल की। बीवी है और सास भी मेरे साथ ही रहती है। मेरी पत्नी एकलौती संतान है।
मैं: उन सब की उम्र कितनी है और नाम?
रौड: बडी बेटी का नाम लता है और छोटी का मधु। पत्नी का नाम रीना है और वो ३७ साल की है और मेरी सास का नाम जया
है, उनकी उम्र करीब ६० साल है। तुम्हारे घर में कौन-कौन है?
मैं: मेरे मम्मी-पापा और एक भैया-भाभी हैं और एक छोटी बहन है, ११वीं में पढती है।
रौड: अच्छा। तुम्हारी छोटी बहन भी सेक्स चैट करती है? उसकी आय-डी क्या है?
मैं: पता नहीं। वो मेरे से ज्यादा पढाकू है।
रौड: तुम कितने दिनों से इस चैट-साईट पर आ रही हो?
मैं: तीन महिने से, और आप?
रौड: मेरा तो यह तीसरा साल है।
मैं: वाह... तब तो आप खुब अनुभवी हैं।
रौड: तुम्हें अनुभवी मर्द पसन्द हैं?
मैं: बहुत ज्यादा मर्दों से मिली नहीं मैं, तो कह नहीं सकती। मैं ज्यादा लेस्बियन रूम में ही चैट करती हूँ।
रौड: क्यों??? तुम लेस्बियन हो?
मैं: नहीं... पर दुसरे किसी भी रूम में जाने से लोग फ़ोन नंबर की जिद करेंगे और फ़िर सारा मूड खराब कर देंगे।
रौड: अच्छा.... मतलब तुम यहाँ मूड बनाने आती हो। अच्छा है फ़िर मैं तुमसे जरा भी किसी बात की जिद नहीं करुँगा।
मैं: देखते हैं...।
रौड: अच्छा बताओ, तुम क्या पसन्द करती हो? किस तरह का चैट करना पसन्द है?
मैं: यह साईट ही सेक्स-चैट के लिए फ़ेमस है, तो फ़िर इस प्रश्न का क्या मतलब हुआ?
रौड: अरे नहीं, कहने का मतलब, तुम्हें रफ़-टफ़, गन्दी और भद्दी गालियों के साथ चैट पसन्द है या कोजी-कोजी सा रोमैंटिक टाईप?
मैं: सच कहूँ तो मैंने अभी तक सही तरीके से सेक्स-चैट किया ही नहीं। हर बात के बाद अगर आप फ़ोन नम्बर की जिद करेंगे तो
क्या चैट होगा...। अब आपको जो पसन्द हो वो कीजिए।
रौड: शीट.... बिजली चली गई और मेरा इंवर्टर का बैटरी पुराना हो गया है तो अब लौग-आऊट होना पडेगा।
मैं: ठीक है, मुझे भी अब जाना होगा। इतने देर के बाद हम मिले कि मेरा भी टाईम हो गया था हटने का। मेरा नेट पर का टाईम
फ़िक्स है, रोज का दो घंटा, ज्यादा देर रुकने से पढाई नहीं हो पात है ठीक से।
रौड: बहुत समझदार हो उम्र के हिसाब से...। बाद में मिलते हैं, कल थोडा एक घन्टा पहले मिलें?
मैं: ठीक है कल १२:३० पर पक्का... बाय।

दिन - २
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मैं: हैलो... आपने आने में इतनी देर क्यों की? मैं बीस मिनट से आपके इंतजार में हूँ।
रौड: सौरी, अपने रूम तक में जरा देर हो गयी ट्रैफ़िक के कारण। फ़िर तुम्हारे साथ चैट के लिए तैयारी भी करनी थी।
मैं: चैट करने के लिए तैयारी???
रौड: हाँ, असल में मैंने अपने घर की छ्त पर एक अलग कमरा बनाया हुआ है औफ़िशियल कामों के लिए। तुम इसे तीसरी मंजिल
कह सकती हो और यहाँ मेरी बीवी या बेटियाँ शायद ही आती हैं। मैंने कल ही तय कर लिया था कि आज इसी कमरे में बैठ
कर चैट करूँगा।
मैं: ऐसा क्या खास है वहाँ?
रौड: कुछ खास नहीं है। कोई यहाँ डिस्टर्ब नहीं करता है तो यहाँ मैं आराम से नंगा बैठ कर जैसे मन वैसे बात कर सकता हूँ। ;-)
मैं: अच्छा, मतलब आप तो पूरी तैयारी से बैठे हैं और अगर कोई आ गया तो?।
रौड: संभावना बहुत कम है फ़िर भी आ गया तो कमरा तो बन्द है। मुझे समय मिलेगा कि मैं दो कपडे दाल लूँ बदन पे।
मैं: बीवी को पता है कि आप लडकियों से ऐसे चैट करते हैं?
रौड: तुम्हारे मम्मी-पापा को पता है कि तुम नेट पर बैठ कर ऐसी गन्दी साईट पर चैट करती हो?
मैं: आप भी कैसी बात करते हैं... यह सब क्या उनको बताया जा सकता है। वो तो समझते हैं कि मैं अपने नोट्स बनाती हूँ नेट
की मदद से।
रौड: मेरे घर वाल्र भी जब मैं इस कमरे में होता हूँ तो समझते हैं कि मैं अपने कम्पनी और सेल्स-फ़ोर्स से परफ़ौर्मेम्स का काम
कर रहा हूँ। मेरे नीचे ४२ आदमी की टीम है।
मैं: अच्छा... मतलब आप बडे अधिकारी हैं अपनी कम्पनी में। ४२ आदमी में कोई लेडी नहीं है?
रौड: ज्यादा नहीं हैं... कम्पनी ने छः महिने पहले ही तीन कि भर्ती की है। नयी हैं तीनों... मुझे डायरेक्ट रिपोर्ट नहीं करती, मेरे
नीचे के आदमी को रिपोर्ट करती हैं।
मैं: मतलब बहुत रिश्ता नहीं है उन सब से ;-)
रौड: अच्छा... अब समझा। तुम जैसा सोच रही हो वैसा रिश्ता नहीं है, पर आज न कल बन सकता है। तीनों अपने काम और
तरक्की के लिए जूनून से भरी हैं। सोच रहा हूँ उनको अब पर्मानेन्ट कर दूँ, दो महिना और बचा है उनकी ट्रेनिंग का।
मैं: मतलब अगर वो आपके साथ मिल कर रहे तो उन्हें फ़ायदा होगा। आपने उनको बताया है यह?
रौड: हिन्ट तो हैं उनको, दो के हाव-भाव से लगता है कि वो नौकरी के लिए सब कर लेंगी। एक मेरे ही पुराने जुनियर स्टाफ़ की
बेटी है तो उसके साथ प्रौब्लम है।
मैं: आपके जुनियर को तो आपका स्वभाव पता होगा फ़िर उसने अपनी बेटी को कैसे आपके साथ काम करने भेज दिया? :-(
रौड: अरे... ऐसी बात नहीं है। मैं शरीफ़ बन्दा हूँ, पर अगर कुछ मिल जाए बिना खास मेहनत के तो खा लेता हूँ यार। तुम तो
मुझे जाने क्या समझ रही हो?
मैं: सच कहूँ तो... ठरकी बुढ्ढ़ा.... जो अपनी बेटी की उम्र की लडकियों के साथ सोने के चक्कर में रहता है।
रौड: हाँ... एक तरह से तुम ठीक ही हो। उम्र बढने के साथ-साथ जवान लडकियों को पाने की चाहत बढने लगी है। फ़िर यह भी है
कि लडकियाँ भी मेरे जैसे अँधेड उम्र के मर्दों के साथ संबंध बनाने के लिए इच्छुक रहती हैं। ताली दोनों हाथों से बजती है
मैडम, सिर्फ़ मुझे ही दोष मत दो। :-(... प्लीज।
मैं: हाँ, ताली दोनों हाथ से बजती है पर एक बात पूछूँ, बुरा लगे तो मना कर दीजिएगा।
रौड: पूछो...
मैं: कभी ऐसा लगता है कि आप गलत काम कर रहे हैं?
रौड: कभी-कभार, पर यह तो समाज में हमेशा से है। मेरी बीवी जानती है कि मैं कभी-कभार जब बाहर काम पर जाता हूँ तो मैं
एक रात के संबंध बनाता हूँ। हमारे सेल्स के काम में काम निकालने के लिए कई बार लड़की भेजनी पडती है क्लाईंट के पास।
स्वभाविक है, जब दूसरों के लिए लडकी का एंतजाम किया जा सकता है तो अपने लिए भी हो सकता है। पर रीना जानती है
कि मैं उसके साथ इमानदार हूँ और अगर कभी मैंने संबंध बनाया है तो वो जब मैं मजबूर हो गया उससे दूर रहने के कारण।
मैं: आँटी तो बहुत अच्छी हैं फ़िर और आप भी लक्की हैं।
रौड: हाँ सो तो है। मेरा पुरा परिवार मुझे बहुर प्यार करता है और मैं भी उन सब से खुब प्यार करता हूँ।
मैं: बीवी से प्यार तो ठीक है, पर य्ह क्या बोल रहे हैं आप... बेटियों से प्यार?
रौड: क्यों क्या तुम्हारे पापा तुमसे प्यार नहीं करते?
मैं: नहीं, असली वाला प्यार तो वो सिर्फ़ मम्मी से करते हैं ;-) हमसे तो वो नकली वाला प्यार करते हैं।
रौड: अच्छा... ... ...। तुम्हें तो प्यार के असली-नकली सब भेद का पता है।
मैं: मैं स्मार्ट गर्ल हूँ :-)
रौड: हाँ सो तो हो। तुम पापा से कहती क्यों नहीं असली वाला प्यार क्यों करने के लिए?
मैं: मेरे पापा आपके जैसे ठरकी थोडे ना हैं। आप लता और मधु से कर सकते हैं?
रौड: लता से नहीं, वो बहुत गुस्सैल है... हाँ मधु सही है, बिल्कुल अपने मम्मी की डुप्लीकेट है। उसके साथ किया जा सकता है ;-)
मैं: छीः... बेटी के बारे में ऐसा सोचते शर्म नहीं आती???
रौड: ओह... सच मानो मैं ऐसे ही कह रहा था, चटपटा बोलने से मजा आता है। तुम बताओ तुम्हें असली-नकली प्यार का राज
कैसे पता चला? कब जानी इसके बारे में?
मैं: बचपन में दो-चार बार देखी थी मम्मी-पापा को प्यार करते और अब तो भैया-भाभी भी हैं घर पे। खुब प्यार देखती हूँ।
रौड: अच्छा... भैया-भाभी को देखती हो? कैसे करते हैं दोनों प्यार?
मैं: कैसे क्या... जैसे औरत-मर्द प्यार करते हैं वैसे ही करते हैं।
रौड: ओह... मेरा मतलब था कि आराम-आराम से पूरे कपडे उतार कर करते हैं या ऐसे ही जल्दी-जल्दी बस नीचे के कपडे खोले
और कर लिया?
मैं: खुब आराम से करते हैं दोनों, तीन महिने पहले तो शादी हुई है तो जल्दी क्यों करेंगे।
रौड: वाह... तब तो तुम मुझसे ज्यादा लक्की हो। एकदम ताजा फ़ूल और रस पीते भौंरे का खेल देखती हो। क्या रोज देखती हो?
मैं: नहीं। मेरे भैया एक्सिस बैंक में हैं, पोस्टिंग अभी बगल के शहर में है, १२० किमी पर तो शुक्रवार रात तो आते हैं और सोमवार
को सुबह चले जाते हैं।
रौड: मतलब शुक्रवार और शनिवार की रात को लाईव शो चलता है तुम्हारे घर में। दोनों बहन साथ में देखती हो?
मैं: नहीं। शुभ्रा को जल्दी सोने की आदत है बचपन से। दस बजते-बजते उसको सो जाना है और फ़िर चार बजे के पहले तो आप
उसको पानी से नहला कर भी उठा नहीं सकते।
रौड: अच्छा, तुम्हें कैसे मौका मिल जाता है यह सब देखने का?
मैं: हमारे और भैया के कमरे के बीच में कौमन बाथरूम है और दोनों कमरों से जुड़ा हुआ है। यूज करते समय हम दूसरे कमरे की
तरफ़ के दरवाजे को भी भीतर से बन्द कर लेते हैं। उसी बाथरूम के सहारे सब देखती हूँ और सही समय पर भाग लेती हूँ।
रौड: वाह... तुम्हारी तो किस्मत सच में बहुत लाजवाब है।
मैं: ही ही ही, पहले तो वो लोग नाईट लैम्प की रोशनी में करते थे पर अब तो दोनों ट्यूब-लाईट जला कर करते हैं। उन्हीं दोनों के
कारण तो मुझे सेक्स-साईट पर आना पड़ा।
रौड: वाह... ... ... क्यों, उन्होंने तो तुम्हें बोला नहीं होगा कि तुम ऐसी साईट पर जाओ और मर्दों से बातें करो।
मैं: नहीं... इसका पता मेरी एक दोस्त है उसने बताया। वो यहाँ आती रही है पहले से और बताई कि यहाँ घन्टा भर बीतने के बाद
मन हल्का हो जाता है।
रौड: और तुम्हारा अनुभव कैसा है यहाँ का?
मैं: बहुत बुरा... अब आपके साथ देखना है कैसा रहता है?
रौड: तुम अभी कैसे बैठी हो?
मैं: क्यों बैठने के तरीके से क्या होगा?
रौड: नहीं समझी। मेरे कहने का मतलब है कि तुम नंगी बैठी हो कि नहीं?
मैं: नहीं।
रौड: फ़िर क्या मजा आएगा... पागल। नंगी हो कर बैठो और चैट करते हुए एक हाथ से टाईप करो और दूसरे हाथ से अपनी चूत
सहलाते रहो, फ़िर देखो कितना मजा आता है।
मैं: ओह फ़िर तो यह अभी नहीं हो सकेगा, घर पर सब लोग है।
रौड: तब फ़िर क्या मजा आएगा :-(
मैं: ऐसा करते हैं कि कल का टाइम रखते हैं, मैं अपने दोस्त के घर चली जाउँगी दोपहर में। उसका घर खाली रहता है दोपहर में।
रौड: ठीक है... इसीलिए तुम्हारी उस दोस्त को मजा आता है और तुम यहाँ बोर हो जाती हो।
मैं: वही मैं भी सोचती थी... नसीमा क्यों इतना तारीफ़ करती है इस साईट की।
रौड: तुम्हारी दोस्त का नाम नसीमा है?
मैं: हाँ... मेरे साथ थी स्कूल में, अब कौरेस्पोन्डेस से बी.ए. कर रही है।
रौड: ठीक है फ़िर, कल करीब १ बजे मिलते हैं। नसीमा भी साथ में रहेगी तो वो तुम्हें सिखाएगी भी।
मैं: हाँ, यही ठीक रहेगा।
रौड: उसको पता है कि तुम्हारे घर पर लाईव शो चलता है और तुम देखती हो?
मैं: नहीं... घर की यह सब बात किसी को बताया जाता है क्या?
रौड: मुझे तो बताई?
मैं: हाँ पर जब लगा कि आप कभी यह सब घर पर नहीं बताएँगे। नसीमा तो हर दो-चार दिन में घर पर आती है, सब से मिलती - जुलती है, बातें करती है।
रौड: हा हा हा... तुम ठीक कह रही हो। पर कल हम बात वहीं से शुरु करेंगे जहाँ आज रुक रहे हैं।
मैं: ठीक है... बाय।
रौड: बाय।
दिन - ३
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रौड: हाय रिया,कैसी है? कहां हो?
मैं: हाय, नसीमा के घर पर हूँ। आप कैसे हैं?
रौड: एकदम मस्त। नसीमा भी है क्या?
मैं: हां, मैं नसीमा हूँ अंकल। हाय।
रौड: हाय नसीमा, जरा अपनी दोस्त को सिखाओ, सेक्स चैट कैसे किया जाता है।
मैं: जी अंकल, वो बताई है और मैंने भी कल वाली बातचीत पढ़ी है। आप तो खुद एक्सपर्ट हैं।
रौड: थैंक्स।
मैं: जरा खाना बना लूं, आप रिया से चैट कीजिए।
रौड: ओके, क्या पकाओगी?
मैं: रिया हूँ, नसीमा चली गई किचेन में।
रौड: ओह। और आज तो तैयार हो चूत से खेलने के लिए?
मैं: जी, आप फिर अपने स्पेशल रूम में हैं?
रौड: हां, मेरे लिये सबसे बेहतर जगह यही है।
मैं: कपड़े उतार चूके?
रौड: बिल्कुल, पूरी तरह नंगा हूँ और लंड सहला रहा हूँ और तुम?
मैं: सोच रही हूँ, नसीमा क्या सोचेगी?
रौड: कुछ नहीं सोचेगी। कपड़े उतारो तब मूड बनेगा।
मैं: हां वो भी जब आपका कल वाला सलाह पढ़ी तो यही बोली। वो सिर्फ नीचे से नंगी होकर चैट करती है।
रौड: तुम पूरी तरह से नंगी हो कर देखो। लड़की के पास ऊपर भी चूच्ची है खेलने के लिए।
मैं: अजीब लगेगा पर.... सोच कर ही अजीब लग रहा है।
रौड: कोई बात नहीं, चलो मूड बनाते हैं थोड़ा फिर नंगी होना। तुम कल भैया-भाभी की बात कर रही थी, बताओ कुछ और उस बारे में।
मैं: क्या बताऊँ अब?
रौड: चलो मैं पूछता चलता हूँ तुम बेहिचक बताते चलो गंदी जुबान में तो चूत जल्दी गीली होगी। जितना ज्यादा डीटेल में कहोगी उतना मजा आएगा।
मैं: ठीक है।
रौड: चलो फ़िर अपने भैया-भाभी का नाम ही बताओ पहले...
मैं: भैया का नाम है रमन और भाभी का रिचा।
रौड: और उम्र?
मैं: भैया की २४ और भाभी की १८। इसी साल १२वीं की परीक्षा पास की है। अब बी.ए. में एडमिशन लेगी।
रौड: अरे वाह... फ़िर तो तुम्हारी भाभी एकदम सहेली है तुम बहनों की :-)
मैं: हाँ... हम पक्के दोस्त हैं।
रौड: अच्छा है। तुम उन दोनों की सुहागरात भी देखी थी?
मैं: नहीं... तब तो घर पर बहुत भीड़-भाड थी, पर उनकी पहला सेक्स देखी थी संयोगवश। फ़िर तो एक रास्ता मिल गया मुझे रोज
देखने का।
रौड: कैसे? कैसे??
मैं: शादी की अगले दिन ही भैया को बैंक की औडिट के कारण जाना पर गया और फ़िर शनिवार को वो आए। उस दिन स्पेशल खाना बना था तो ज्यादा खा लेने से पेट भारी हो गया था। मैं करीब ११ बजे बाथरूम गई तो बगल के भैया के कमरे से उनकी आवाक सुनाई दी और तब मैं वहीं बाथरूम में रूक कर दरवाजे की झिर्री से झाँक कर देखी तो सामने सब दिखा। एक बार तो लगा कि यह गलत है, पर सहेलियों से बहुत सुना था कि सुहागरात मतलब यह..वह तो थोडा देखने की लालसा हो गई।
रौड: उनकी बात सुन पा रही थी?
मैं: हाँ... कभी-कभार कोई शब्द नहीं भी सुनाई देता था, पर जब बेड दरवाजे से सिर्फ़ चार फ़ीट हो तो बेड पर की बात सुनाई तो दे रही थी। असल में उनकी बात ही तो पहले सुनाई दी जिससे मेरा मन हुआ की मैं देखूँ।
रौड: अच्छा... क्या सब बातें हो रही थी उन दोनों में?
मैं: भैया कह रहे थी कि आज करने दो, और भाभी उस दिन केवल चुम्मी वगैरह के लिए तैयार थी और कह रही थी कि वो कल
करवाएगी बाकी सब।
रौड: वाह... फ़िर क्या हुआ? दोनों तब पहने क्या थे?
मैं: भैया तो सिर्फ़ अपना हाफ़-पैन्ट पहने थे, जो उनका नौर्मल है जब से देख रही हूँ। भाभी नाईटी पहन कर गयी थी सोने पर अब
उनके बदन पर ब्रा और पैन्टी थी।
रौड: जरूर तुम्हारे भैया ने उतारा होगा। लडकों को लडकियों को नंगा करने में मजा आता है। ब्रा-पैन्टी किस कलर की थी?
मैं: पीली, लेस-एलास्टिक और नेट वाली जैसा शादी के टाईम लडकियों को आमतौर पर दिया जाता है।
रौड: अच्छा... तुम जब देखी तो क्या हो रहा था कमरे में?
मैं: भैया भाभी को चुम रहे थे और कह रहे थे कि वो आज ही करवा ले, पर भाभी कह रही थी कि दर्द होगा इसलिए वो कल दर्द
की दवा पहले खा लेगे तब करवाएगी पर भैया जिद पर थे कि आज ही करेंगे।
रौड: अच्छा... फ़िर पहले नंगा कौन हुआ?
मैं: भैया, वो खुद ही अपना पैन्ट उतार कर भाभी का हाथ पकड़ कर अपना उनके हाथ में दे दिए।
रौड: तुम इसके पहले भैया का लन्ड देखी थी?
मैं: हाँ, पर ऐसे नहीं। हाफ़-पैन्ट पहनने से कभी-कभी साईड से हल्का सा झलक जैसा दिख जाता था। पर आज पहली बार ऐसा
टाईट हाल में देखी।
रौड: तुम्हें अच्छा लगा?
मैं: जी... तभी तो मैं और देखने के लिए रुकी।
रौड: भाभी तुम्हारे भाई का लन्ड चूसी थी क्या?
मैं: नहीं तब नहीं चुसी थी बाद में भैया ने उनके मुँह में डाला था। तब तो भैया सिर्फ़ उनको मनाने में लगे हुए थे।
रौड: अच्छा... आगे क्या हुआ?
मैं: भाभी को मान जाना पडा, शादी हुई थी उनकी तो यह तो उनको करना ही था।
रौड: भाभी ने खुद अपने कपड़े उतारे?
मैं: नहीं. भैया ने उतारे और फ़िर बडी वाली बत्ती जला दी। भाभी शर्मा कर तकिये से अपना बदन ढ़्क ली तो भैया ने कहा कि एक बार अपना नंगा और कुँवारा बदन ठीक से देखने तो दो। इसके बाद नंगी हो भी गई तो कुँवारी थोडे न रहोगी। भैया की यही बात सुन कर पहली बार मेरा मन गिनगिना गया था।
रौड: ऊफ़्फ़्फ़्फ़.... बहुत गजब की सेक्सी बात कही है तुमने। आगे की बताओ... मेरा तो लन्ड फ़नफ़ना गया है यह सब सुनकर।
मैं: भैया ने भाभी को फ़िर जमीन पर खडा कर दिया और उनको तीन-चार बार गोल-गोल घुमा कर सब तरफ़ से देखा। भाभी जब-तब अपने हाथों से अपने अंगों को ढ़कती, पर भैया उनके हाथ नीचे कर देते थे। इसके बाद वो भाभी को बेड पर लिटा दिए और फ़िर उनकी जाँघ खोल कर उन्के प्राईवेट पार्ट को देखने लगे। वो कई तरीके से भाभी के पैर को इधर-उधर कर-करके भाभी के अंग देख रहे थे। अब तक भाभी को भी यह सब अच्छा लगने लगा था। वो भी साथ दे रही थी।
रौड: तुम क्या कर रही थी वहाँ खडे हो कर। मेरा तो यह सब सुनकर ही लग रहा है कि फ़ट जाएगा।
मैं: बदन की सुरसुरी के कारण मैम अपने अंग को सहला रही थी। इअतनी समझ तो मुझे थी कि यह सब क्या है?
रौड: अच्छा ... और बताओ आगे क्या हुआ?
मैं: फ़िर भैया भाभी को पलट दिये और फ़िर उनकी चुतड़ों को सहलाए और उसके बाद वो भाभी को कमर से पकड कर बिस्तर पर
हल्के से उठाए तो भाभी अपने घुटओं और हाथ के सहारे जानवर बन गई। इस समय ही भैया भी बिस्तर पर चढ गए और
फ़िर भाभी के सामने जा कर उनके मुँह में अपना औजार डाल दिया और अपने हाथ से भाभी के प्राईवेट पार्ट को सहलाने लगे।
इसी समय पहली बार मैं भाभी के उन हिस्से को बिल्कुल साफ़ देख पाई। पहले जब भैया उनको लिटा कर देख रहे थे, तब
भैया के चेहार के कारण यह हलक की तरफ़ ही दिखा था।
रौड: बहुत बढ़िया, बहुत अच्छा डिस्क्राईब कर रही हो। कैसा था तुम्हारी भाभी का चूत? कुँवारी चूत का वर्णन कर पाओगी?
मैं: कोशिश करती हूँ। पीछे से वो करीब तीन-चार ईंच की फ़ाँक जैसी दिख रही थी, हल्की फ़ुली हुई। मेरी भाभी बहुत गोरी है तो
फ़ाँक भी खुब गुलाबी दिख रही थी। भैया अपने हाथों में थूक लगा-लगा कर उसको सहला रहे थे।
रौड: अरे... एक बात तो भूल गया पूछना।
मैं: क्या?
रौड: झाँट के बारे में।
मैं: ओह... भाभी अपना साफ़ की थी शाम को। मुझसे ही हेयर-रिमुवर ली थी।
रौड: अरे... तो क्या वो शादी के पहले साफ़ नहीं की थी?
मैं: नहीं... भाभी बताई कि उनकी मम्मी ने बोला था कि वो अपना बाल-वगैरह शुरु में लगातार साफ़ करती रहे। अब चुँकि शादी के टाईम तो साफ़ था पर भैया के साथ सोने का समय तो उनका एक सप्ताह बाद आया था, सो वो फ़िर से साफ़ करना चाहती थी, पर वो जब अपना सामान चेक की तो उसमें उनको अपना रिमुवर मिला ही नहीं। मुझसे वो सुबह ही बोली थी नया लाने के लिए तो मैंने कह दिया मेरे पास है न। सो शाम को नहाने जाते समय भाभी मेरा माँग कर ले गई थी।
रौड: और जरा भैया के लन्ड के बारे में बताओ..
मैं: क्या?
रौड: तुम लडकी हो... लन्ड के बारे में बात करोगी तो जल्दी गीली हो जाओगी।
मैं: भैया का रंग सांवला है तो वो भी थोडा काला था। टाईट और हार्ड दिख रहा था। सामने से हल्का-हल्का भीतर का लाल
हिस्सा झलक रहा था।
रौड: चूत गीली हुई तुम्हारी? नंगी हो
मैं: हाँ...., सलवार उतार दी हूँ, पैन्टी पहन कर नहीं आई।
रौड: ठीक है, अब सहलाओ और आगे की बात टाईप करते रहो।
मैं: इसके बाद भाभी बोली कि उनको शर्म आ रही है ऐसे सो बडी वाली लाईट बन्द कर दो और भैया भी भाभी की बात मान कर
लाईट औफ़ कर दिए।
रौड: मतलब अब तुमको दिखना बन्द हो गया?
मैं: नहीं बडी वाली लाईट बन्द कर दिए, पर नाईट-लैम्प की रोशनी तो थी सो सब ठीक-ठाक दिख रहा था। वो दोनों उसके बाद
बिस्तर पर एक-दूसरे से लिपट गए और एक दूसरे को खुब चुमने लगे।
रौड: अच्छा... फ़िर चुदाई कैसे हुई? उनदोनों की आपस की बात-चीत क्या हो रही थी?
मै: कुछ खास नहीं ऐसे ही... तुम बहुत सुन्दर हो, भैया भाभी की बडाई कर रहे थे और भाभी भैया के प्यार की तारीफ़ कर रही
थी। फ़िर भैया उनके प्राईवेट अंग को चुसने और चातने लगे थे और भाभी के मुँह से आह निकलने लगी थी। मैं तो कैसे करके
अपने को शान्त रख कर सब देख रही थी। थोडी देर बाद भैया ही पूछे कि रिचा पता है न लडकी को दर्द होता है पहली बार
डलवाने में। तब भाभी बताई कि हाँ उनकी माँ ने बताया है सब और साथ ही वो अचानक बोली कि रुको... एक बात तो गडबड
हो जाती अगर मम्मी की बात न आती और वो तेजी से बिस्तर से उतरी।
रौड: अच्छा... अब यह क्यों? ऐसा क्या कह दिया था उस कुंवारी कली की माँ ने? और लौंडियाँ भी कमाल की है, सील तुड़ाने के
लिए नंगी हो जाने के बाद भी माँ की बात याद कर रही है।
मै: नहीं, भाभी की माँ ने भाभी को सब बताया था। एक तरह से ठीक ही है, पता नहीं मेरी मम्मी को क्या सब याद रहेगा मेरी
शादी के समय। भाभी एक पुराना बेडसीट निकाल कर उसको चार फ़ोल्ड करके बिस्तर पर बिछाने लगी और बोली कि मम्मी ने
बोला था कि दर्द तो होगा सो होगा पर थोड़ा खून भी निकलेगा। अगर बिस्तर पर दाग लग गया तो सुबह-सुबह नये घर में
परेशानी होगी और फ़िर अपने वैनिटी बैग से एक ओलिव-आयल सी शीशी ले कर फ़िर से बिस्तर पर आ गई।
रौड: ही ही ही, तुम्हें मम्मी की एडवाईस की जरुरत ही नहीं है, तुम तो अब सब सीख समझ गयी हो बस प्रैक्टिकल ही करना
बाकी रह गया है तुम्हारे लिए या वो भी हो गया है ;-)
मै: अब हो गया है प्रैक्टिकल भी, पर तब नहीं हुआ था।
रौड: अच्छा जी... इसके बारे में बाद में समझंगे, अभी तो रिचा की सील तुडाई की बात जानने का मूड बन गया है... और बताओ
कि आगे क्या-क्या हुआ?
मै: भैया उनके हाथ में तेल की शीशी देख कर बोले कि इसकी क्या जरुरत है... तुम्हारी * तो ऐसे ही खुब गीली हो गई है।
रौड: अबे साली "चूत" लिख ना...., जवान हो गई हो और इतना शर्मा रही हो। सेक्स-चैट करने बैठी हो तो रांड की तरह बात
करो... तब जाकर मजा मिलेगा। ऐसे करने से ही तीन महिने से आ रही हो और आज तक मजा नहीं लूटी हो।
मै: ये "साली’ क्या आपने मेरे लिए लिखा है?
रौड: हाँ... अगर बुरा लगा तो माफ़ करना, सौरी... जरा जोश में था... अभी भी हूँ।
मै: नहीं... ठीक है। असल में अपने लिए साली सुनने की आदत नहीं है न। पर ठीक है अब आदत हो जाएगी, आज असल में जा
आ रहा है चैट करते हुए। आपके और नसीमा की बात मानकर अपना अंग सहलाते हुए जब चैट कर रही हूँ।
रौड: ठीक है, अब मैं तुम्हें अलग-अलग तरीके से पुकारूँगा और हाँ ये "अंग" क्या है? ... व्हाट अंग? एक बार "चूत" कह कर देखो
मजा न आए तो कहना।
मै: ;-);-) ठीक है, मुझे बहुत मजा आ रहा है जब मैं अपने चूत को सहलाते हुए आपसे चैट कर रही हूँ आज ;-)
रौड: आये हाये... मेरी छम्मक-छल्लो... इसी बात पर तेरी चूत पर एक चुम्मी... ><
मै: ही ही ही...
रौड: और बताओ आगे...
मै: भाभी बताई कि उसको बताया गया है कि तेल जरुर दोनों लोग शुरु में लगा कर हीं करे, नहीं तो बाद में भी दर्द होता रहेगा
कुछ घन्टे तक, और वो शीशी से तेल निकाल कर अपने अपने चूत पर चुपडी और फ़िर भैया के अंग पर लगाया।
रौड: फ़िर "अंग"... , अबे साली, अपने भाई के "लन्ड" को लन्ड कहते लाज आ रही है?
मै: सौरी... सौरी, भाभी ने फ़िर भैया के लन्ड पर तेल लगाया।
रौड: जे हुई न बात रंडियों वाली...। अब तेरी चूत का क्या हाल है? अपने भाई के लन्ड को याद करके रस तो नहीं छोड रही है?
मै: बहुत गीली है, उँगली फ़िसल जा रही है।
रौड: उस रस को चाटो... स्वाद और मजा लो उसका। उसके बाद क्या हुआ?
मै: फ़िर भाभी लेट गई और भैया को इशारा किया। भैया भी उनकी टाँगों के बीच में चले गए और अपने हाथ से भाभी की फ़ाँक
को खोल कर सहलाने लगे तो भाभी सिसकी लेने लगी। इसके बाद भैया पूछे कि रेडी हो रिचा... डाल दें भीतर और जब भाभी
ने हाँ कहा तो वो बोले कि जब दर्द हो तो साँस मत रोकना, लेते रहना और अपना बदन पूरी तरह से ढ़ीली छोड़ दो कम
तकलीफ़ होगा।
रौड: तुम्हारा भाई तो पूरा एक्स्पर्ट है भाई... सही सलाह दिया था।
मै: हाँ, वही सलाह मेरे टाईम में भी काम आई।
रौड: तुम्हारी बात तो बाद में सुनुँगा, अभी तो रिचा की चुदाई की बात बताओ।
मै: फ़िर क्या... भैया ने अपना लन्ड भाभी की चूत के मुँह से सटाया ही था कि भाभी डर के मारे लन्ड को हटा दी। भैया ने तीन
बार और सटाया पर भाभी हटा देती तो भैया ने उनको समझाया कि अब वो डर छोड़े और एक बार डलवा लें। आज न कल तो
यह दर्द एक बार उनको बर्दास्त करना ही है, तो क्यों न आज ही हो जाए जिससे आगे वो जब मन तब चोद सकें। भाभी भी
सर ऐसे हिलाई कि सब समझ गई है और फ़िर से ठीक से लेट गई। इस बार भैया ने भाभी को ही लन्ड को चूत से सटाने का
काम दिया और अपने हाथ तो फ़्री रखा। जब भाभी ने लन्ड को अपने चूत की फ़ाँक से सटाया तो भैया ने कहा कि वो दूसरे
हाथ से फ़ाँक को खोलें जिससे लन्ड भीतर जा सके। भाभी इस तरह से एक हाथ की ऊँगलियों से अपने फ़ाँक खोली और दूसरे
से लन्ड को फ़ाँक से लगाया और बस उसी समय भैया ने अपने दोनों हाथों से भाभी की कमर को कस कर पकड़ा और जब
तक वो कुछ समझती एक बार जोर से झटका दे कर अपना लन्ड आधा अंदर कर दिये। भाभी के मुँह से जोर से चीख निकली
पर भैया ने फ़ुर्ती से अपने हाथ से उनका मुँह दबा दिये और फ़िर एक और झटका दिये और अपना लन्ड पूरा भीतर डाल दिये।
इसके बाद वो भाभी के बदन को दबा कर उनके ऊपर लेट गए। भाभी अपना सर इधर-ऊधर करके थोड़ा छटपटाई और फ़िर
शान्त हो गई तब भैया ने अपना हाथ उनके मुँह से हटाया और कहा अब सब हो गया है। भाभी हल्के-हल्के सिसक रही थी
और कह रही थी कि अब और भीतर वो नहीं डालें, आगे वो अब दूसरे दिन डलवा लेगी और भैया उनको समझा रहे थे। फ़िर
भैया ने उनको कहा कि देख लो अब भीतर कुछ नहीं जाने को बचा है, पूरा अंदर डल चुका है तो भाभी अपना सर ऊठा कर
देखने की कोशिश की। फ़िर भैया ने उनका हाथ पकड कर उनकी चूत पर रखा कि छू कर फ़ील कर लो कि पूरा भीतर है।
भाभी को जब तसल्ली हो गई तो वो मुस्कुराई और तब भैया ने पूछा कि क्या अब वो चुदाई शुरु करें। भाभी इतनी देर बाद
पहली बार बोली कि तो अभी तक क्या कर रहे थे - भजन? भैया ने कहा कि हाँ और फ़िर अपने हाथ के सहारे अपने बदन को
भाभी के बदन से ऊपर करके चुदाई शुरु किये। शुरु में धीरे-धीरे जिससे भाभी को तकलीफ़ न हो। फ़िर भी भाभी कभी-कभी
कराह देती थी पर जब भाभी की कराह मस्ती वाली आह हो गई तो तेज-तेज चोदने लगे। फ़िर करीब पाँच मिनट बाद कब भैया
भी आह-आह करने लगे तो मुझे लगा कि अब यह सब खत्म हो रहा है तो मैं वहाँ से भाग कर अपने बिस्तर पर आ गई और
सोने का प्रयास करने लगी पर उस रात नींद बहुत देर बाद आई।
रौड: वाह... मेरा भी अब झड़ गया है। तुम्हारा क्या हाल है?
मै: बढ़िया... इतनी गीली कभी नहीं हुई थी मैं। आज पहली बार इस तरह से भैया-भाभी की बात करके मन सच में हल्का हो गया
है। थैंक्स... आप सही बोले थे। नंगी हो कर सहलाते हुए चैट करने का मजा ही कुछ और है। ओह नसीमा भी आ गई है और
मुझे ऐसे देख कर मुस्कुरा रही है।
रौड: अच्छा... क्या वो सामने है कंप्यूटर के?
मै: नहीं, अभी कमरे के सामनों को ठीक-ठाक कर रही है.... क्यों?
रौड: जरा बुलाना उसको, मैं तो हूँ नहीं वहाँ क्या वो मीरी तरफ़ से तुम्हारे बदन की गर्मी शान्त कर देगी यही पूछना है।
मै: नहीं... वो यहाँ आएगी तो यह सब पढ लेगी। कहीं बाद में घर पर न कह दे किसी से यह सब बात?
रौड: अरे कोई नहीं... ऐसा कुछ नहीं होगा। अगर तुम दोनों आपस में बदन का रिश्ता जोड लोगी तो फ़िर यह बात और पक्का हो
जायेगा कि वो किसी से कुछ नहीं कहेगी। लेस्बीयन चैट करके तुम तो कुछ सीख ही गई होगी और नसीमा तो जैसा तुम बताई
कि वो पूरा एक्स्पर्ट है तो वो तो अब वैसे भी तुम्हें नहीं छोडेगी अब सलवार उतार कर तुम बैठी हो सामने।
मै: आप भी न... कहाँ की गोटी कहाँ फ़िट कर देते हैं।
रौड: अरे समझो मेरी माँ... चूत की गर्मी अगर ऊँगली से ही शान्त करनी हो तो अपनी ऊँगली से बेहतर दूसरे की ऊँगली होती है।
मै: ओह.. सच में। आप सही थे, नसीमा अब मुझे इशारा कर रही है कि मैं कंप्यूटर बन्द कर दूँ और वो अपने कपडे भी उतार रही है। ऊँगली से इशारा कर रही है। आह... आह्ह्ह्ह्ह.... बाय।
रौड: लगता है शुरु हो गई तुम्हारी सहेली... ठीक है मजे करो। कल शाम आठ बजे मिलते हैं बाय।
मै: ब्ब्ब्बाआय्य्य्य....
दिन - ४
---------
रौड: हैलो.... लगता है कल नसीमा ने तुम्हारी चोद दी। ठीक से बाय भी न बोल पाई।
मैं: सब आपके कारण हुआ, आपके चक्कर में मैं ऐसे उसके घर नंगी बैठ गई थी।
रौड: हा हा हा, तुम्हारी बातों ने तो मेरा भि निकाल दिया जानू... फ़िर तू कैसे बच जाती कल। अगर नसीमा ना चोदती तो मैं
आकर तेरी सील तोड देता।
मैं: हूँह... ऐसे ही नहीं मैं कभी भी किसी से सेल तुड़ाती... कभी आईने में शक्ल ले लेना पहले।
रौड: मुझे आईने में नहीं तुम्हारी आँखों में अपनी शक्ल देखना है मेरी जान।
मैं: अच्छा...। आपको मजा आया कल मेरी बातों से?
रौड: बहुत मेरी रानी... एक चुम्मी तुम्हारे गालें पर। अब बताओ कल उसके बाद क्या हुआ नसीमा से साथ?
मैं: वाह जी... । सब राज मैं हीं खोलूँ और आप केवल मस्ती कीजिए... ये ना होगा।
रौड: अच्छा... फ़िर क्या होगा?
मैं: कल मैं भैया-भाभी के पहली रात की बात बताई तो आज आप अपनी पहली रात की बात बताईए न अंकल।
रौड: अंकल की सुहागरात के बारे में जानना है मेरी बाबू को?
मैं: हाँ...अब आज आपकी बात होगी फ़िर मैं बताऊँगी कि कल उसके बाद क्या हुआ था।
रौड: ठीक है, जैसी मेरी बाबू की इच्छा...।
मैं: चलिए शुरु हो जाईए अब बिना देर किए।
रौड: अठारह साल पहले १९९९ की मई में मेरी शादी हुई थी। रीना तब १९ साल की थी छोटे शहर की भोली-भाली और शर्मीली सी
लडकी। उसके पापा की डेथ के बाद रिश्तेदारों ने उसकी शादी तय कर दी और फ़िर उसके घर के रिवाज के अनुसार हम दो
दिन वहाँ ही रूके जिससे कारण मेरी सुहागरात उसी के घर में बीती। तुम विश्वास नहीं करोगी कि गर्मी के दिनों में भी वो
कितना कपडा अपने बदन पर लादे थी उस सुहागरात को।
मैं: क्यों ऐसा क्या पहन ली थी मेरी आंटी?
रौड: कुल सात कपडे खोलने पडे थे तब जा कर उसका नंगा बदन दिखा था उस रात।
मैं: अच्छा...
रौड: उसकी एक सहेली ने उसको एक बिकीनी का सेट दिया था सुहागरात में पहनने के लिए और वो पागल देहाती लड़की उस छोटे
से बिकीनी के ऊपर से अपना रेगुलर ब्रा भी पहन ली और पैन्टी भी। इसके बाद साया, साडी, ब्लाऊज... और जान लो, वो
अपना रेगुलर वाला ब्रा-पैंटी ठीक सोने के पहले बाथरूम में जा कर पहन कर आई थी।
मैं: हा हा हा... ऐसा पागल वाला काम क्यों की थी, आप पूछे नहीं?
रौड: उसकी बचकानी सोच... और क्या? बहुत पूछने पर बताई कि वो यह सोची की इस तरह से वो बच जाएगी मेरे से।
मैं: आह्ह... बेचारी, सच में बहुत भोली थी और एक आप हैं एक नंबर के चालू।
रौड: थैंक्स..., पर मुझे तो उसको चोदना ही था। मैंने गर्म मौसम का वास्ता दे कर उसके कपड़े उतारे तो सिर्फ़ साडी के बाद अड़
गई कि अब नहीं उतारेगी। मैंने बहुत समझाया पर वो मानने को तैयार नहीं थी। साया तो मैं किसी तरह उतारने में कामयाब
हो गया पर वो ब्लाऊज को हाथ भी लगाने न दे रही थी। हालत ऐसे बिगड़े की मैंने ढमकी दे दी कि अगर अब वो चुपचाप
कपड़े नहीं उतारेगी तो अभी बाहर जा कर सब को कह दुँगा कि मैं उसकी विदाई नहीं कराऊँगा और जब लोग पूछॆंगे तो सब
बता भी दुँगा।
मैं: अच्छा... फ़िर?
रौड: पहले तो उसको विश्वास नहीं था पर जब मैंने कमरे के दरवाजे को खोल दिया पूरी तरह तो वो घबड़ा गयी फ़िर दौड़ कर
अपने हाथों से कमरे का दरवाजा बन्द कर लिया, मेरी सास ने तब पूछा भी कि जमाई जी क्या बात है कुछ चाहिए क्या? पर
वो तब तक दरवाजा बन्द कर ली और फ़िर वहीं दरवाजे से सट कर अपना ब्लाऊज उतार दी।
मैं: आप भी गजब हैं... बेचारी आंटी।
रौड: ही ही ही... उसके चेहरे पर घबडाहट थी और अब वो अपने जाँघों को सिकोड़ रही थी और अपने हाथों को अपने छाती पर
क्रौस कर लिया था। वो एक गुलाबी ब्रा-पैन्टी पहने हुए थी, एकदम नया-नया। मैंने अब उसकी कमर को पकडा और सहारा
देकर बिस्तर पर लाया तो वो बोली कि बिजली बन्द कर दीजिए न पहले और जब मैंने पूछा कि तब दिखेगा क्या और करेंगे
क्या हमलोग तो बोली कि पीछे की खिड़की का पर्दा खोल दीजिए। शीशा से बाहर सडक पर के वेपर लैम्प से खुब रोशनी
आता है कमरे में और मैंने ऐसा ही किया।
मैं: अच्छा, मतलब उस एक धमकी के बाद वो हार मान ली, हैं न?
रौड: हाँ लगभग... मुझे जब लगा कि अब सब ठीक है तो मैंने पहली बार उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर चूमा और उसको
बोला कि वो भी मुझे चूमे। कुछ सेकेन्ड लगा पर वो भी मुझे चूमने लगी और तब मैंने उसकी छाती पर अपना हाथ लगाया तो
वो थोडा हिचकी और बोली कि क्या हमलोग यह सब दो दिन बाद आपके घर जा कर नहीं कर सकते हैं? तो मैंने दो टूक बोल
दिया कि नहीं सुहागरात का मतलब वह रात जब लड़का-लडकी पहली बार साथ सोते हैं और मैं तो सुहागरात को ही अपनी
सुहागरात मनाऊँगा।
मैं: बहुत बेचैनी में थे क्या अंकल उस रात?
रौड: हाँ बाबू, जिन्दगी में पहली बार मौका मिल रहा था जवान लडकी के साथ सोने का तो बेचैनी होनी ही थी। यार-दोस्तों ने भी
खुब चढ़ा दिया था कि लडकी से दबना मत सुहागरात को... तो वो सब भी था दिमाग में।
मैं: अच्छा ... फ़िर?
रौड: मैंने उसकी ब्रा उतारी तो देखा की भीतर वो एक और ब्रा पहने थी, पतला और जालीदार। मुझे यह देख बडा अजीब लगा तो
उससे पूछा और जब वो चुप रही तो फ़िर वही धमकी दिया कि अब अगर चुप रही तो अभी मम्मी जी से जा कर पूछुँगा कि
यह क्या सिखा कर आप अपनी बेटी की शादी कर दिये हैं। हालाँकि यह मजाक था पर रीन फ़िर से घबड़ाई और बोली कि वो
यह सोच कर ज्यादा कपडा पहनी कि इससे उसका बदन ठीक से ढक जाएगा। मुझे हँसी आ गई और मैंने पूछा कि और नीचे
भी ऐसे ही ढ़ँकी हो क्या अपना खजाना? वो शर्माते हुए हा~म में सिर्फ़ सर हिलाई तो मैंने उसको प्यार से गले लगा कर अपने
से चिपका लिया और उसको पता भी शायद नहीं चला और मैंने उसकी उस ब्रा का हुक पीछे से खोल दिया और जब वो मेरे
बदन से जरा दूर हटी तो उसकी ब्रा ढीली होकर जैसे ही थोडा हिली की मैंने उसको लपक कर उसके बदन से अलग कर दिया।
वो अब बहुत शर्माई, पर मैंने उसके हाथों को जबर्दस्ती उसके पीछे कर दिया जिससे उसकी चूचियाँ मेरे सीने से सटने लगी और
तब मैंने उसको कहा कि अब वो अपना नीचे वाला कपडा अपने हाथ से उतारे नहीं तो मैं जोर-जोर से बोलने लगुँगा और बाहर
तक आवाज जाएगी।
मैं: बेचारी को तो आप बूरा फ़ँसा दिये थे उसके मायके में।
रौड: हाँ... और वो बोली कि आप चुप रहिए और मैं उतार देती हूँ और वो भी अब हालत समझ रही थी तो एक-एक करके अपना
दोनों पैन्टी उतार दी।
मैं: आप तो आंटी को सच में.... ओह... हद कर दिये...
रौड: अरे बाबू, मेरी यह धमकी आज इतने सालों बाद भी कारगर है, अभी भी मैं सप्ताह दस दिन में बोलता रहता हूँ कि अगर
तुम बात नहीं मानी तो पता है न, सब मम्मी जी को बता दूँगा और अब तो मेरी सास भी इसी चक्कर में रहती है कि मैं
उसको क्या बता दूँगा... हा हा हा।
मैं: अच्छा मजाक है..... अब इतने सालों बाद क्या बता दीजिएगा, आंटी को समझ में नहीं आता है कि अभी भी उसी धौंस से डर
जाती है।
रौड: हा हा हा...., अब बात तो कुछ ऐसा होता नहीं है पर वो आज भी यही समझती है कि मैं बता दूँगा कि वो सुहागरात को दो-
दो पैन्टी पहन ली थी कि वो बच जाएगी ऐसे.... हा हा हा।
मैं: हा हा हा..... अच्छा आपका हाल तो बेहाल हो गया होगा जब पहली बार नंगी लडकी देखे होंगे?
रौड: हाँ यार.... तब हमारे छोटे शहरों में ब्लू-फ़िल्म भी कुछ खास नहीं मिलता था। मैगजीन में मस्तराम की कहानी और कुछ
फ़ोटो देखे थे तब, पर वो भी अखबार के कागज पर छपे घटिया टाईप के। असल में जब सामने नंगी लड़की देखी तो लगा कि
लोग सही कहते हैं कि शादी के समय दुल्हा राजा होता है। वो अपने हाथों से अपने चूत को छुपा ली और जब मैंने उसको
हाथ हटाने को कहा तो वो बोली, नहीं अब पहले आप नंगे हो जाईए तब मैं दिखाऊँगी।
मैं: मतलब... आप लड़का हो कर तब कपडों में थे और बेचारी आँटी को नंग्गा कर दिये.... अजीब हैं आप भी।
रौड: हाँ यार... तब यह याद ही नहीं आया कि पहले मुझे नंगा होना चाहिए था। उसके कपडें उतारने में ऐसे उलझा कि अपनी बात
याद ही नहीं रही। फ़िर मैंने भी चट से अपने कपडे उतार दिया और खुब शान से अपना लन्ड उसके सामने लहरा दिया। वो
शर्मा कर अपना सर दूसरी तरफ़ घुमा ली और तब मैंने कहा कि अब वो भी अपना हाथ हताए और मुझे देखने दे।
मैं: अच्छा, कैसा लगा तब नंगा होकर एक लडकी के सामने? क्या आपका एकदम खडा था।
रौड: अरे यार... मैं तो भूल ही गया कि तुम लड़की हो, तुम्को तो लन्ड के बारे में डीटेल में बताना है। अभी क्या उँगली कर रही
हो अपनी चूत में?
मैं: हाँ भीतर नहीं घुसाई हूँ अभी, ऊपर-ऊपर रगड रही हूँ और गीली कर रही हूँ। जब आप आंटी में घुसाईएगा, उसी समय मैं भी
अपनी ऊँगली भीतर डालूँगी।
रौड: अच्छा, मतलब अब घर पर भी नंगी बैठने का जुगाड़ हो गया है? तुम्हारी वो पढ़ाकू बहना कहाँ है?
मैं: कोचिंग गई है आठ बजे आएगी, इसीलिए तो मैं मान गई जब आप यह टाईम बोले तो। मैं एक स्कर्ट पहन ली हूँ अगर मम्मी
अचानक से कमरे में आए भी तो सीधे खडा हो जाना है बस सब ठीक हो जाएगा। स्कर्ट का सबसे बडा फ़ायदा यही है कि हवा
लगता रहता है और अगर गीली हो भी गई तो चट सुख जाएगा।
रौड: अच्छा जी..., और मम्मी बोलती नहीं है कि ऐसे मत रहा करो हमेशा।
मैं: बोलती है पर कुछ खास नहीं बचपन से ऐसा ही है और वो जानती हैं कि जब-जब मैं ऐसे रहती हूँ मैं इसका ख्याल रखती हूँ
कि बदन ना दिखे।
रौड: फ़िर से "चूत" बोलना सेखाना होगा क्या मेरी गुडिया?
मैं: ही ही ही.... नहीं नहीं... अब से "चूत" को चूत ही बोलूँगी। आप अपने "लन्ड" का वर्णन कीजिए ना प्लीज।
रौड: हाँ, अब ठीक है। तो मैं अपना लन्ड रीना के सामने लहरा दिया। मेरा लन्ड काला है करीब ७" का और मुझे लगता है कि उस रात की तुलना में अब ज्यादा मोटा हो गया है। लगता है चूत से निकलने वाला रस लन्ड के लिए टौनिक होता है।
मैं: अरे नहीं.... चोदते रहने से लन्ड का कसरत होता है, ऐसा मैंने पढ़ा था कहीं पर। वो भी तो मसल्स का ही है और जब आप
लगातार चोदते हैं तो उस मसल्स का कसरत होता रहता है और इसीलिए अँधेड़ उम्र में लन्ड मोटा हो ही जाता है, हर उस मर्द
का जो लगातार लडकियों को चोदते रहते हैं। यही अगर आप साल-छ: महिने गैप कर दीजिए लन्ड छोटा हो जाएगा। सिम्पल
बात है बुद्धू आदमी।
रौड: वाह... यह तो बड़ी मजेदार बात बताई तुम... अब तो रोज चोदना होगा अगर यही कसरत है तो। रीना तो रात में जबर्दस्ती
चोद दूँगा अगर वो न मानी तो जैसा उस सुहागरात को चोदा था।
मैं: अच्छा जी, याद रहे घर में सास भी है... तब बच गए थे, अब कहीं वो पीट न दें।
रौड: हा हा हा... अब तो अगर सास बीच में आई तो उसको भी वहीं लिटा कर पेल दूँगा। वो भी तो समझे कि उसका दामाद
कितना दमदार है और कैसे उसकी बेटी की चूत का ख्याल आज तक रख रहा है।
मैं: छीईईईईई... मैं जवान हूँ तो मेरे पे लाईन मार रहे हैं और साथ में बुढ़िया पर भी नजर है।
रौड: क्यों बुढिया की चूत क्या फ़ाँकवाली नहीं होती है?
मैं: फ़ाँक तो सब की चूत में होती है, तो इसका क्या मतलब है?
रौड: मतलब साफ़ है कि जहाँ चूत मिल जाए और अगर मौका हो तो लन्ड से उसकी सेवा जरूर की जानी चाहिए।
मैं: अच्छा चलिए बहुत बात हुई अब बताई कि आंटी को चोदे कैसे?
रौड: अरे हाँ... वो बात तो बीच में ही अटक गया और हम भटक गए। हाँ तो वो जब मुझे ऐसे बेशर्म की तरह लन्ड हिलाते देखी
तो अपना मुँह दूसरी तरफ़ फ़ेर ली और मैंने कहा कि अब अपना हाथ हटाओ और देखने दो मुझे और पहली बार वो बिना
हिचके अपने हाथ अपने चूत से हटा दी और मेरा लन्ड एक झटका खा गया जोर से। रीना थोडा सांवली है तो उसका चूत भी
वैसा ही था पर एकदम साफ़ चकाचक। मैंने जो फ़ोटो सब देखा था तो उसमें लडकियों की झाँटे होती थीं। तुम्हें तो पता होगा
कि पहले चूत के बाल साफ़ करने का कुछ ट्रेंड नहीं था। यह सब इधर दस साल से शुरु हुआ है। मुझे याद है कि मेरी दीदी
जो मुझसे आठ साल बडी है, उनकी शादी हुई थी तब मैं दस-ग्यारह साल का था और तब पूनम दीदी को बाल साफ़ करने की
सलाह भी कोई नही दिया था। वो जब शादी का जोड़ा दर्जी के यहाँ से आया था तो नापने के लिए पहनी तो उस स्लीवलेस
ड्रेस से उनकी काँख के बाल दिखने लगे तो मुझे याद है कि माँ बोली कि जा जल्दी से पापा का सेविंग बौक्स ले कर आ और
दीदी को बोला गया कि वो ड्रेस उतार कर अपने काँख का बाल साफ़ कर ले।
मैं: अच्छा, तो आप दीदी का बाल भी साफ़ किये हैं ;-)...
रौड: नहीं रे... तब तो मैं बच्चा था पर उस दिन पानी भी मैं ही लाया था और दीदी मुझसे ही पूछ-पूछ के साफ़ की थी। दीदी
अपना ब्लाऊज खोल कर और साड़ी से अपनी चूचियों को लपेट कर अपना काँख का बाल साफ़ की थी। उस समय ऐसा ही था,
अगर दिखे ना तो कोई बाल साफ़ नहीं करता था। शायद पहली बार वो साफ़ कर रही थी सो बहुत बडे-बडे बाल थे, मुझे
लगता है दो-दो ईंच तक के होंगे।
मैं: मतलब आपके दीदी की झाँट तीन-तीन ईंच की होगी कम से कम... कैसा लगता होगा...।
रौड: तब का ऐसा ही था, अब तो मेरी बेटियाँ १२-१३ की हुई होगी जब जिद करके हेयर-रीमुवर खरीदवाई :-) :-) :-)
मैं: अच्छा फ़िर तो आपको सही में झटका लगा होगा आँटी की ऐसी साफ़ देख कर।
रौड: हाँ रे... और मैंने पूछ हीं लिया कि यह कैसे साफ़ है, बाल नहीं उगे क्या तुम्हारे? मुझे तब लगा था कि जैसे कुछ लोगों को
दाढी-मुँछ कम होता है ऐसा ही मामला है। तब वो बताई कि नहीं बाल तो है वो रेजर से साफ़ कर ली है। मुझे बहुत आश्चर्य
हुआ यह सुन कर और मैंने उसपर हाथ फ़ेरा तो लगा की हाँ बाल शेव किया हुआ है। मैंने उसके बाद बगल में लेट कर उसको
अपने से चिपका लिया और चुमने लगा। वो भी साथ दे रही थी, पर जब मैं जोश में आता तो बोलती ज्यादा आवाज मत
कीजिए, बाहर आवाज न जाए।
मै: अच्छा ...मतलब अब वो चुदाने के लिए तैयार थी।
रौड: हाँ, और मेरा तो लन्ड पहले से फ़नफ़नाया हुआ था। मैंने मस्तराम की कहानियों में पढा था कि लड़की को चोदते समय
उसकी गाँड के नीचे तकिया रख दिया जाता है तो चोदने में सहुलियत होती है तो मैंने बिस्तर के तकिये को उसकी कमर के
नीचे लगा दिया। वो तब पूछी कि ऐसा क्यों? तब मैंने बताया कि ऐसे नीचे तकिया लगाने से भीतर घुसाने में सुविधा होता है।
तब वो मुझे बहुत एक्स्पर्ट समझ कर चुप हो गई।
मै: क्यों??? आप अपने को एक्स्पर्ट नहीं समझ रहे थे क्या तब जब तकिया लगा रहे थे?
रौड: हाँ मुझे मस्तराम की कहानियाँ याद आ रही थी कि कैसे लडकियों को उन कहानियों में चोदा जाता था। मैं जब उसकी चूत को
सहला रहा था और फ़ाँक को फ़ैला रहा था तो उसकी चूत गीली हो गई और वो अपने पैरों को सिकोडने लगी। यह कहानियों के
हिसाब से एक इंडीकेशन था कि अब लडकी चुदाने के लिए तैयार है और जब मैं उसके जाँघों के बीच में आया तो बो बस
इतना पूछी कि आप तो देखे हैं मेरा नीचे का छेद... आपका वाला भीतर चला जाएगा ना कोई परेशानी तो नहीं होगी। तब मैं
पूरे आत्मविश्वास से कहा था कि हाँ बिल्कुल फ़िक्र मत करो, आराम से जाएगा। बस एक बार एक सेकेन्ड के लिए हल्का सा
दर्द होगा जैसे सुई लेते समय होता है और फ़िर मजा आएगा। वो बेचारी भोली-भाली थी तब और मान गई। फ़िर मुझे याद
आया और मैंने उससे कोई तेल के बारे में पूचा तो वो खुद उठ कर ड्रेसिंग टेबुल पर से सर में लगाने वाला आँवले का तेल का
शीशी दी। मैंने थोडा तेल उसकी चूत की फ़ाँक में लगाया जितना भीतर ऊँगली डाल कर लगा सका और अपने लन्ड को भी तेल
से गीला कर लिया।
मै: मस्तराम तो बडी बढिया किताब है... पूरा ट्रेम्ड कर दिया था आपको।
रौड: हाँ... पर मजा तब आया जब मैंने लन्ड भीतर घुसाने की कोशिश की। जब दबाता वो अपना बदन कडा करती और तेल से
भींगे होने मेरा लन्ड इधर-उधर फ़िसल जाता। शुरु में तो डर था उसको भी और मुझे भी कि पता नहीं क्या-कैसे होगा पर जब
बार-बार की कोशिश में लन्ड बार-बार फ़िसलने लगा तो हमें हँसी आने लगी। वो तो बोल भी दी कि आपको आता भी है घुसाने
नहीं? कभी किये नहीं क्या किसी में? मुझे बडी कोफ़्ती हुई और बोला कि अगर तुमको आता है तो तुम घुसा लो ना ठीक से।
मेरे लिए भी यह पहली बार ही है... तेल के कारण परेशानी हो रही है। उसने तब अपने हाथ से मेरे लन्ड को पकडा और फ़िर
अपनी चूत पर लगा कर बोली कि अब दाबिए मैं इसके पकड़े हुए हूँ और इस बार मेरा करीब २" अंदर गया तब उसको लगा
कि क्या हो रहा है और वो अपना हाथ मेरे सीने पर लगा कर मुझे अपने ऊपर से हटाने के लिए ठेली और आह करके बोली
कि रुकिए दर्द हो रहा है... पर गुरु मस्तराम का यह चेला अब सही समझ गया था कि अगर अब उसके ऊपर हटा तो फ़िर वो
अपने पर चढ़ने नहीं देगी तो मैंने उसके बात को इग्नोर करके उसके ऊपर और जोर डालते हुए झुका तो मेरा लन्ड और भीतर
गया और वो अब सही दर्द महसूस की और फ़िर खुब जोर से मुझे ठेली अप्र मैं भी उतने ही जोर से ऊपर से झुका। १८ साल
की लडकी थी रीना तब और मेरा लन्ड उसकी चूत के घुस कर उसको दर्द से बेचैन किये था। आवाज बाहर न जाए इस फ़िक्र
में वो अपने होठ भींचे हुए थी।
मै: बेचारी...
रौड: हाँ... और जब उसका ताकत खत्म हो गया तो उसका हाथ एक झटके से कमजोर हुआ पर मैं भी ऊपर से जोर लगा रहा था
तो उसका हाठ ढीला होते ही मैं धप्प से उसके छाती पर गिरा और मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत में जड़ तक घुस गया। वो तब
बहुत जोर से चीखी कि ओ माँआँआँआआआ मर गई रे.... बाप रे ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह। मैंने उसको याद दिलाया कि चुप रहो इतना
जोर से हल्ला करोगी तो लोग क्या कहेगा? अब वो दर्द से बेहाल थी और एक रट लगाए थी कि मम्मी को बुलाओ... मम्मी को
बुलाओ... मम्मी को बुलाओ...
मै: हा हा हा.... आप बुला क्यों नहीं दिये मम्मी को, फ़िर मजा आता।
रौड: हा हा हा... तब इतनी समझदारी नहीं थी न। खैर किसी तरह बहला कर उस्को शान्त करके फ़िर चुदाई शुरु की पर तब रो
नया-नया यह कर रहा था पाँच-सात धक्के में ही मेरा निकल गया और फ़िर मैं बाहर निकाल लिया। उसकी असली चुदाई तो
मेरे घर पर हुई सुहागरात के पाँचवें दिन।
मै: हाँ, आपके घर पर तो वो बेचारी मजबूर थी... आप शेर बन गए होंगें?
रौड: अरे यार... उससे भी मजेदार बात... वो जो तकिया मैंने कमर के नीचे लगाया था उसके चूत का खुन और मेरा और उसका
रस, सब उसपर लग गया और एक बडा सा धब्बा बन गया और अब उसको कैसे छुपाया जाए इसी में अब उलझ गए।
मै: अच्छा... फ़िर कैसे छुपाए यह राज?
रौड: नहीं छुपा पाए न बाबू। सुबह तो सब को पता चल ही गया कि रात क्या हुआ है, वो चीखी ही थी इतना जोर से। जब हम
सुबह बाहर निकले तो रीना थोड़ा धीरे चल रही थी और कुछ पर्शान थी तब उसकी मौसेरी भाभी ने कहा कि रीना जी... रात का
चादर वगैरह जो होगा निकाल दीजिएगा, धुल जाएगा... आप परेशान मत होईए... ऐसा सब के साथ होता है, ये कोई नयी बात
नहीं है। मैं उनकी बात सुनकर झेंप गया तो मुझसे मजाक करते हुए बोली कि क्यों जमाई बाबू, आपको मेरी ननद पसंद आयी
कि नहीं?
मै: हा हा हा, उनका तो रिश्ता ही मजाक वाला था आपके साथ।
रौड: हाँ, पर मैंने झेंपते हुए कहा कि अगर पसंद नहीं आती तो शादी कैसे करता... पहले ही बता देता? पर वो तो पूरा औरत थी
सो मुस्कुराते हुए बोली कि अरे वो तो ठीक है पर रात में तो अकेले में उसका रोआँ-रोआँ देखे होंगे। ऐसे तो किसी लड़की को
सिर्फ़ उसका भतार देखता है। मेरी बन्नो दिखाई कि नहीं अपना सब कुछ या ऐसे ही बहला दी आपको? मुझे बहुत शर्म आई
उनकी बात पर और तब उनके पति यानि रीना से मौसेरे भाई ने कहा कि अरे यार अब उसको क्यों परेशान कर रही हो और
तब हँसते हुए भाभी बोली कि इसमें परेशान क्या करना है, यह तो पुरानी कहावत है कि बेटी में क्या रस है अगर जानना हो
तो जमाई से पूछिए तो यही पूछ रही हूँ जमाई से... और सब ठहाका लगा कर हँस पडे सिवाय मेरे और रीना के।
मै: हा हा हा.... आप दोनों की स्थिति तो साँप-छुछँदर वाले हो गयी होगी... न ऊगलते बनता होगा न निगलते। चलिए बाय...
लगता है शिवानी आ गई टयूशन से।
रौड: अच्छा बाय... अब कब मिलोगी?
मै: अब दो दिन बाद, मैं नसीमा के घर जाऊँगी करीब दो बजे दिन में। ठीक है... आपका इंतजार करुँगी।
दिन - ५
----------
मैं: अरे अंकल आप शाम में आज फ़िर से?
रौड: हाँ, आज तबीयत सुबह में ठीक नहीं लगी तो छुट्टी कर लिया और फ़िर बोर हो रहा था तो यहीं आ गया। तुम्हारी उम्मीद तो
थी नहीं, सोचा कहीं कोई और मिल जाए तो टाईम पास हो जाएगा। भगवान का शुक्र है कि तुम भी आ गई। तुम तो दो दिन
बाद आने वाली थी फ़िर...? चूत की खुजली यहाँ खींच लाई न.. ;-)
मै: नहीं असल में हमें मार्केट जाना था आज, पर भीड के डर से आज सुबह ही हो लोये मार्केट से। शाम में अभी घर पर मैं
अकेली हूँ। मम्मी और भाभी एक रिश्तेदार के घर गए हैं अभी शिवानी ट्यूशन तो मैं भी बोरियत दूर करने आ गई :-) अच्छा
हुआ आप मिल गए।
रौड: वाह अच्छा है फ़िर... आज पूरी तरह से नंगी हो कर बैठो... कुछ गरमा-गरम बातें करो.... मेरी भी तबियत खिल जाएगी और
तुम्हारी भी।
मै: हाँ... सच में आज अच्छा मौका है। शिवानी भी अभी दो घन्टे के बाद ही आएगी। जब ऐसे चूत से खेलते हुए मजा आता है तो
आज नंगी हो कर मजा लेती हूँ। एक मिनट कपडे उतार लेती हू पहले।
रौड: :-) :-) जता बताना भी अपने बदन के बारे में ... जरा डिटेल से बताना अपना पूरा हुलिया।
मै: ठीक है। मेरी फ़ीगर है 32A-22-35 और वजन है 40 किलो। दुबली-पतली हूँ... रंग साफ़ है.... और... और बस.
रौड: लम्बाई और चूची तथा चूत के बारे में तो कुछ बताई ही नहीं :-(
मै: ओह... लम्बाई है 5'2"... चूच्ची छोटी-छोटी है, हल्का भूरा निप्पल है। चूत थोडी फ़ुली हुई है, दुबली हूँ तो ज्यादा दिखती है।
रौड: बाल हैं तुम्हारे... झाँट
मै: हाँ पर अभी छोटे हैं, मैं साफ़ करती रहती हूँ... पन्द्रह-बीस दिन में एक बार, पर अभी है करीब बारह दिन पुराना।
रौड: और चूत के बाहर भी ओठ दिखते हैं क्या? चूत का रंग कैसा है?
मै: रंग तो सांवला है चूत का और भीतर के होठ इसे बाहर नहीं निकलते पर अब जब खेलुँगी तो बाहर चमडी दिखेगी थोडा सा।
रौड: अच्छा... मतलब अभी लन्ड ज्यादा नहीं पेलवाई हो शायद इसीलिए अभी कसी हुई है? कितनी बार चुदी हो? पाँच-छः बार हो
गया है?
मै: आप तो जादूगर है, हाँ एक्दम पाँच बार ही। कमाल है.... कैसे समझे?
रौड: तुम्हारी चूत के वर्णन से। अगर कुँवारी होती तो वो चमड़ी इस उम्र में बाहर से शायद ही दिखती और अगर रेगुलर चुद रही
होती तो पक्का बोलती कि हाँ बाहर से दिखती है। असल में लडकी जब लगातार बीस-पच्चीस बार चुदवा लेती है तब जाकर
उसकी चूत ठीक से खुलती है। अब गौर से अपनी भाभी की चूत को देखना और अपनी चूत से तुलना करोगी तो समझ में
आएगा।
मै: हूँम्म्म्म्म्म.... यही है एक्स्पीरिएंस।
रौड: थैंक-यू मैडम। मुझे भी यह तब समझ में आया जब कुछ लडकियों को लगातार चुदा शुरु से। बीस-पच्चीस के उम्र की कुँवारी
लड़की की चमडी भी बाहर से दिखने लगती है, पर टीन-एज की लडकी की ज्यादा कसी होती है। बच्चियों की देखी होगी, कैसा
रहता है... पता भी नहीं चलता कि चूत के भीतर भी होठ है, बस फ़ँक दिखता है। घर में ही तो है सब... शिवानी का अभी भी
तुम्हें नहीं दिखेगा और अगर मम्मी का देखी तो पता चलेगा कि चूत के भीतर के होट पर्मानेन्ट ही बाहर रहते हैं हल्का सा।
अब भाभी का देखोगी तो तुमसे ज्यादा बाहर दिखेगा... वो तो पिछले बारह वीकेन्ड में, मतलब 24 रातों में कम से कम 25-
30 बार तो डलवाई ही होगी?
मै: ज्यादा, जब भैया घर पर रहते हैं तो दिन में भी भाभी के साथ कमरा बन्द कर लेते हैं। दोपहर में लंच के बाद आराम के
बहाने दो-दो तीन-तीन घन्टे दोनों कमरे में बन्द रहते हैं।
रौड: अच्छा... तुम कभी पूछी नहीं भाभी से कि क्यों ऐसे पूरी दोपहर वो लोग सोए रहते हैं। नयी भाभी है, वो भी सेम उम्र की...
उसको तो अपनी ननद से बात-चीत करना चाहिए।
मै: क्या पूछना है जब सब पता ही है। वो कमरे में बन्द हो और बाथरूम में जब जाईएगा तो सब समझ में आ जाएगा। वो तो
शिवानी टीवी के चक्कर में नीचे रहती है सो निभ जाता है। असल में ऊपर में दो कमरे हीं है और बीच में बाथरूम है बताया
ही था। बाकी का छट खुला हुआ है। नीचे तीन कमरे और किचेन वगैरह सब है। मम्मी-पापा नीचे ही रहते हैं, फ़िर एक ड्राईंग-
रूम है और एक गेस्ट-रूम।
रौड: अच्छा है फ़िर, तुम्हारे तो मजे हैं फ़िर।
मै: क्या मजा अंकल, जब भी उन दोनों को देखो तो फ़िर मन अजीब सा हो जाता है।
रौड: तुम्हारे भाई को ख्याल नहीं रहता कि बगल में दो छोटी बहनें रहती हैं?
मै: पता नहीं, वो तो इसी दुख से दुखी हैं कि उनको बीवी का सिर्फ़ दो दिन ही मिल पाता है। वो तो हमेशा कहते रहते हैं, काश
रिचा कभी पूरा सप्ताह लगातार तुम्हें चोदता और भाभी भी उनकी हाँ में हाँ मिलाती है।
रौड: नयी जवानी है और अभी ताजा-ताजा मजा मिला है, इसीलिए इतनी बेचैनी है।
मै: हाँ, भैया का तो रवैया ही बदल गया है शादी के बाद से...। बल्कि भाभी एक बार बोली भी कि आप हमेशा मेरे साथ कमरे में
घुसे रहते हैं तो रिया और शिवानी क्या सोचेगी। अगर वो बाथरूम में आईं तब ऐसी जो आवाज आप करेन लगते हैं जोर-जोर
से धक्के देते हुए, उनको कैसा लगा? पता है तब भैया ने क्या जवाब दिया था?
रौड: क्या?
मै: उन दोनों को मैं तब पाँचवीं बार देख रही थी और तब भैया बोली कि जाने दो इस सब बात को, ऐसी बच्ची नहीं हैं अब वो
दोनों। मेरे कई दोस्त उन दोनों पर लाईन मारते हैं, मुझे पता है। अब उनके लिए मैं अपने मजे क्यों खराब करूँ। तुम चुपचाप
लेटी रहो, मेरा स्वाद मत खराब करो। मेरे भैया तब उनकी चूत को चूस रहे थे। उसी दिन पहली बार मैं देखी कि वो दोंनो
ओरल-सेक्स किये चुदाई करने से पहले।
रौड: अच्छा... मतलब पहले चुदाई ही करते थे डायरेक्ट?
मै: हाँ, एक-दूसरे को सहलाते, चुमते और फ़िर भाभी नीचे लेट जाती और भैया तेल लगा कर ऊपर से भाभी के भीतर डाल देते
और चुदाई करते।
रौड: अच्छा जी... "भैया का लन्ड भाभी की चूत में" - ऐसे नहीं बोल सकती और भाई ऐसा जो अपने दोस्तों को तुमपर लाईन
मारने देता है फ़िर यह सोच-सोच कर मजे लेता है। तुम्हें मैं बताऊँ... वो पक्का तुम्हारे नाम की मूठ निकलता होगा शादी के
पहले या क्या मालूम अब भी निकालता हो...;-)
मै: अरे हाँ, यह तो मैं सोची ही नहीं, जब मैं बाथरूम के दरवाजे की झिर्री से उनके कमरे में देख सकती हूँ तो वो भी तो अपने
कमरे से बाथरूम में देख सकते हैं। ओह शीट.... मेरा तो बदन सिहर गया यह सोच कर ही और आप हैं कि मुझे नंगा बिठा
लिये हैं चैट करने के लिए।
रौड: तुम्हारे लिए तो अच्छा है न, लडकी को तो खुश होना चाहिए कि लडके उसके लिए मूठ मारते हैं... वो भी जिनको नहीं मारना
चाहिए। मैं भी महिने-दो महिने में अपनी बेटियों के लिए मूठ मार लेता हूँ।
मै: छीईईईईईईई..... बहुत गन्दे है आप... मुझे ऐसे उम्मीद नहीं थी।
रौड: अच्छा ... और अपने भाई से उम्मीद थी कि वो अपने दोस्तों के साथ तुम्हारे लिए मूठ मारेगा। जानू, अगर कुछ टाईम तक
लडकी ना मिले तो सब लोग मूठ मारते ही मारते हैं और तब वो या को किसी फ़िल्मी हिरोईन के बारे में सोचते हैं या फ़िर
किसी ऐसी लडकी के बारे में जिनको वो जानते हैं। यह सब एकदम नैचुरल है और हमेशा से यही होता आया है।
मै: हाँ, आप ठीक कह रहे हैं... शायद। अच्छा, ज्यादा किसके लिए मूठ मारते हैं - लता के लिए या मधु के लिए?
रौड: लता अब ज्यादा जवान है तो नैचुरली लता के लिए ज्यादा। एक बात और बताऊँ, पिछले साल उसकी सोलहवें जन्मदिन पर
मैंने ही उसको उसके जीवन का पहला ब्रा-पैन्टी का एक सेट गिफ़्ट किया था, वो भी डिजाईनर वर्ना इसके पहले उसके पास वही
नौर्मल सफ़ेद ब्रा और लाल-पीली-नीली टाईप पैन्टी होती थी।
मै: ओह गौड.... और आंटी कुछ बोली नहीं??? इट्स सो शौकिंग... फ़ादर गिफ़्टिंग हिज डौटर अ ब्रा-पैन्टी सेट औन बर्थ-डे। मुझे
विश्वास नहीं हो रहा।
रौड: रीना क्या बोलती मैंने पहले ही उसको बता दिया था कि zivame.com से मैंने लता के लिए एक और्डर किया है, उसका बर्थ-डे
प्रेजेन्ट... उसी दिन डेलीवरी होगी। वो बोली कि आप खुद तो कमीने हो ही अब बेटियोण को भी बिगाडोगे। मैंने भी उसको
समझा दिया कि ऐसा नहीं है, अब बेटियों से दोस्ताना रिश्ता ही हमने बनाया है शुरु से तो दोस्तों वाली बात भी तो होनी
चाहिए। ऐसी उम्र में जरुरी है कि हम बेटियों से ज्यादा दूर ना हों, इसी उम्र में लडकियाँ बहक जाती है। ऐसे गिफ़्ट से हमारी
बेटियाँ हमारे करीब आएंगी, नहीं तो अपना दिन याद करो... कैसे चिल्ला-चिल्ला कर मम्मी को बुला रही थी तुम।
मै: हा हा हा, वैसे आपकी बात सही है। लता का क्या रिएक्शन था?
रौड: खुश हुई, उसे उम्मीद नहीं थी कि मैं उसके लिए ऐसा गिफ़्ट दिलाऊँगा। वो बिना किसी हिचक से सब के सामने मेरे गले लग
कर बोली थी, थैंक-यू पापा और मैंने भी तब सबके सामने कहा कि अभी एक बार पहन कर दिखाओ सब को शाम में तो और
भी लोग रहेंगे, ’स्वीट-सिक्स्टीन’ की पार्टी में और वो दो मिनट में बिना हिचक उस डिजायनर ब्रा-पैन्टी में अपने कमरे से
निकल कर बाहर आई तो मेरे मुँह से निकला - हैप्पी बर्थ-डे मेरी गुड़िया और वो फ़िर से मेरे गले लग कर थैंक-यू बोली तो
मैंने कहा कि वो माँ का भी आशीर्वाद ले और वो रीना के भी गले लगी और रीना ने भी उसको हैप्पी बर्थ-डे बोला और बोली कि
जाओ अब उतार दो, शाम में नयी वाली फ़्रौक के साथ पहनना फ़िर।
मै: ओह.... मुझे तो अभी भी विश्वास नहीं हो रहा...।
रौड: इस साल भी एक सेट दिया हूँ... थोड़ा ज्यादा सेक्सी। इस साल उसका ’सेक्सी सेवेन्टीन’ बर्थ-डे था ना। इस बार वाली के फ़ोटो
में तुम्हें भेजता हूँ। ये वाली ऐसी थी कि मैं कह नहीं पाया कि पहन कर दिखाओ सब को। जालीदार है और पारदर्शी भी,
नाईलोन की है। मुझे डर था अगर पहन कर सामने आई तो उसके प्राईवेट अंग शायद हल्के से झलक जाएँगे।
मै: अच्छा अंकल... वेरी गुड। अपनी बेटी की बात आई तो "प्राईवेट अंग" और मेरी बारी थी तो "चूत"... बहुत अच्छे ;-)
रौड: ओह सौरी यार.... सच में मुश्किल है ऐसे कहना फ़िर भी। हाँ तो मैं कह रहा था कि अगर वो इस साल वाले गिफ़्ट को
पहनेगी तो मुहे लगता है कि उसकी चूत दिखेगी पैन्टी से और अगर कहीं बाल भी होते तो झाँट तो पक्का दिखता। मैं भेज रहा
हूँ इस बार वाली ब्रा-पैन्टी के सेट की फ़ोटो, तुम खुद समझ जाओगी।
मै: ठीक है..... मतलब अब हर साल आप उसको यही गिफ़्ट करेंगे।
रौड: नहीं, बस एक साल और। अगले साल वो 18 की हो जाएगी और मैंने अभी से कह दिया है कि अगले साल के बाद तुम मेरे
से इसकी उम्मीद मत करना। अपना बाय-फ़्रेड बना लेना और उसी को बोलना गिफ़्ट करेगा। 20 ना 25 सेंटीमीतर कपडा रहता
है और इतना ज्यादा दाम। इस बार वाला ज्यादा सेक्सी है तो कपडा कम है और दाम पिछले वाले से दोगुना है। अगले साल
और सेक्सी वाली दूँगा तो और ज्यादा दाम लगेगा। इसी साल उसका दाम 2700/- है अगले साल लता के जन्मदिन तक तो
पक्का तीन-साढे तीन हजार हो जाएगा।
मै: मतलब... आप अभी से पसंद कर लिए हैं?
रौड: हाँ... मैं उसकी भी फ़ोटो भेज दूँगा, देख लेना। बहुत ही ज्यादा सेक्सी है। जब सोचता हूँ कि यह लता पर कैसा लगेगा तो मेरा
लन्ड ठनक जाता है, जैसे अभी हो रहा है।
मै: अच्छा... अब क्या कीजिएगा?
रौड: लता के लिए अब मूठ मारूँगा, और क्या कर सकता हूँ।
मै: अच्छा... फ़िर मेरे लिए कब?
रौड: अरे मेरी रानी बिटिया... तुम्हारे लिए तो कब का मूठ मार कर पानी निकाल चुका हूँ। जब तुम अपने भाई की बात बता रही
थी तभी निकला पानी मेरा। अब तो लता की बात करते हुए लन्ड ठनका है तो उसके लिए ही निकलना वाजिब होगा :-) :-)
मै: अंकल मेरा भी ना आज बहुत निकला है। जाँघ तक भींग गया है। बीच-बीच में जो अपने ऊँगलियों को निकाल-निकाल कर
अपने बदन पर इधर-उधर फ़ेरी हूँ तो सब गीला हो गया है और अब तो खट्टा-खट्टा गंध भी नाक में जाने लगा है। मन कर रहा
है कि नहा लूँ। कहीं ऐसा न हो कि मेरी भाभी सब समझ जाए, वो आज कल बहुत तेज हो गई है इस सब मामले में।
रौड: अच्छा जाओ और ठीक से साफ़ कर लो अपना बदन, कल मिलोगी इसी टाईम?
मैं: पक्का.... कल आपको अपने भाभी की तेजी के बारे में बताऊँगी और तब आपको पता चलेगा कि मेरे साथ क्या हुआ?
रौड: अच्छा.... अपने भाई से ही चुदवाती हो क्या?
मैं: अरे नहीं.... कल मिलिए, सब पता चल जाएगा। बाय...
रौड: बाय... मेल चेक कर लेना, फ़ोटो भेजा है।
मैं: ठीक है।
दिन - ६
---------
मैं: हाय अंकल, गुड इवनिंग :-)
रौड: गुड इवनिंग बेटा, कैसी हो?
मैं: कल तो देर तक आपकी बात दिमाग में घुमती रही... और आप भी कैसे ऐसी गिफ़्ट, बेटी को दे दिये यही सोचते मुझे रात को
एक बजे नींद आई।
रौड: ही ही ही.... :-) :-) :-) अगले साल वाला तो और जबरदस्त है न?
मैं: हाँ, दोनों हीं बेटी को देने लायक तो किसी हाल में नहीं है। दोनों में नीला वाला बेहतर है कुछ कपडा है पर छेद को ढकने का
दोनों में कोई उपाय नहीं है और आप सफ़ेद वाले को अपनी पहली पसन्द बनाए हुए हैं।
रौड: हाँ... क्योंकि मुझे और रीना दोनों को पता है कि वो पैन्टी नहीं पहनती ज्यादा, अब तो अगर रीना कभी टोकेगी तो कह भी
देगी कि गर्मी लगता है ऐसे ही ठीक है हवा लगता रहता है, और अब सब ऐसे ही पहनती है। तो उस सफ़ेद वाले में फ़ायदा यह
है कि उसकी चूत खुली रहेगी और स्टौकिंग्स के कारण लगेगा की लडकी सही अंडर-गार्मेंन्ट्स पहने हुई है। न होगा तो पूछ
लूँगा कुछ दिन पहले उससे।
मैं: आपके हिम्मत की दाद देनी पडेगी। मेरी तो आप कल रात खराब कर दिए।
रौड: अरे कोई नहीं.... मुझे भी शायद अपनी बेटी पर क्रश है... और शायद इसीलिए... और फ़िर तुम हो न मेरी बेटी तो मेरा
निकलवा दो एक बार ठीक से आज फ़िर... तुम जो अपनी भाभी की बात बताई थी न उस दिन गजब का माल निकला था और
रात में नींद भी बढ़िया आई।
मैं: अच्छा... ठीक है। आज आपको एक बात बताती हूँ बहुत सीक्रेट...
रौड: क्या .. क्या?
मैं: भाभी अगले हफ़्ते भैया के साथ पाँच दिन के लिए जाने वाली है। भैया के साथ सोमवार को सुबह जाएगी और फ़िर शुक्रवार को
दोनों साथ में लौटेंगे।
रौड: अच्छा... फ़िर इसमें सीक्रेट वाली क्या बात हुई भई??? :-(
मैं: भाभी वहाँ चुदवाने जा रही है... :-)
रौड: हाँ... ऐ तो सब लडके के साथ होता है वो पति के साथ उसके जौब पर जाती है अकेले रहती है और खुब चुदाती है। रीना को
भी जब मैं पहली बात साथ लाया तो दिन में तीन बार चोदता था, सुबह-शाम और रात, नियम था यह।
मैं: हाँ.. हाँ पता है यह सब। पर सीक्रेट वाली बात को गौर कीजिए - भैया के दो दोस्त हें स्कूल के जमाने के, लंगोटिया यार
टाईप। संयोग देखिए की तीनों अलग-अलग बैंक में हैं पर तीनों की पोस्टिंग एक ही शहर में है और तीनों की शादी भी पिछले
छः महिने में हुई है। भैया पिचले हफ़्ते भाभी को बता रहे थे कि वो दोनों दोस्त आपस में अपनी बीवी शेयर करते हैं हफ़्ते में
एक बार और तब भैया ने बताया था कि वो भी दो-चार बार उनकी बीवीयों के साथ सेक्स कर चुके हैं। जब भैया ने भाभी से
पूछा कि क्या वो भैया यह कर्ज उतार सकती है तो भाभी शुरु में ना-नुकर की पर जब भैया ने बार-बार कहा तो मान गई। वो
तब बोले कि अगले हफ़्ते उनको साथ ले जाएंगे और वहाँ भी उन सब को बता देंगे कि अगले हफ़्ते वो अपनी बीवी ला रहे हैं।
है न यह मजेदार राज की बात?
रौड: अरे वाह... यह तो गजब की बात कही तुने। मुझे शुरु से लग रहा था कि तुम्हारा भाई पक्का हरामी है। सही में वो तीनों
दोस्त तो अब पांडवों की तरह दोस्त बने रहेंगे... फ़ेवीकोल के जोड से चिपक गये हैं। तुम्हारी भाभी के तो जलवे सातवें
आसमान पर हैं, तुम क्यों पीछे रह गई चुदाने में।
मैं: ऐसे पीछे नहीं हूँ... अगर अपनी पहली चुदाई से गिनूँ तो आज सताईसवाँ दिन है और पाँच बार भीतर डलवा ली... यह स्कोर
कम थोड़े न है... और यह भी तब जब मैं कुँवारी हूँ?
रौड: हैं...ये क्या कह रही हो? पाँच बात चुदवा ली लन्ड से और अभी तक कुँवारी हो, कौन से टेकनीक से चुदी थी मेरी बुलबुल?
मैं: मेरे कहने का मतलब.... जब मेरी शादी नहीं हुई है तो अभी सब के लिए कुँवारी ही हूँ न...
रौड: हाँ... यह सही बात है ;-) अच्छा कौन चोदा तुमको पहली बार?
मैं: पहली बार क्या.... अभी तक सिर्फ़ उसी से चुदी हूँ... पहली बोलिए, दूसरी बोलिए... हर बार।
रौड: अच्छा है, कौन था वो लकी मैन... मुझे तो जलन हो रही है?
मैं: बताऊँगी तो बम फ़तेगा आप पर...
रौड: ऐसा क्या???? तुम्हारी भाई चोदा क्या तुम्हें? साला कुछ भी कर सकता है अब।
मैं: नहीं.... पर वो भी भैया ही हैं।
रौड: अच्छा .... कजन ब्रदर.... अपने देश में सबसे ज्यादा कजन्स ही आपस में सेक्स करते है। मुझे तो अपने बेटियों के लिए
उसके ममेरे भाई से खतडा लगता है, कहीं वो इनको फ़ँसा न ले।
मैं: नहीं... ऐसे कजन नहीं है... भाभी के भैया हैं।
रौड: माय गौड... ... मतलब हिसाब बराबर... तेरे भाई ने उसकी बहन चोदा तो उसने तुम्हें चोद कर हिसाब बराबर कर लिया, ग्रेट।
मैं: ही ही ही.... हमारे तरफ़ एक कहावत देहाती कि अगर स्वर्ग जाना हो तो तीन में से कोई काम करना पडेगा - या तो सौ
ब्राह्म्ण की बेटी चोदो, या तीन मुसल्मान की, या एक बहनोई की बहन चोद दो - तो यहाँ तीसरा वाला फ़िट हो गया :-)
रौड: अच्छा.. यह हुआ कैसे और कब?
मैं: अभी पिछले महिने आये थे, भाभी की चचेरी बहन की शादी का न्योता लेकर। एक दिन रूके थे, तभी शायद अपनी बहन को
अपनी पसन्द बताए होंगे और उनके जाने के बाद भाभी लगातार कुछ ज्यादा ही मुझसे खुल कर बात करती और सेक्स की भी
बात करती। फ़िर मुझे उकसाती कि तुम क्यों नहीं किसी के साथ सेक्स करके मजा लेती हो। इसके बाद जो वो एक सप्ताह के
लिए मायके गई तो मुझे भी साथ ले गईं और फ़िर वहीं हुआ यह।
रौड: उस शादी-ब्याह के हंगामें में मौका कैसे मिल गया इतनी बार करने के लिए?
मैं: मैं दो रात और एक दिन शादी वाले घर से गायब थी। उसके भैया अभी कंपटीशन्स की तैयारी कर रहे हैं तो पढ़ने के लिए वो
एक अलग रूम किराये पर लेकर रखे हैं। बुढे मकान-मालिक हैं, उनको कुछ खास मतलब रहता नहीं है और वो रूम में ऊपर
छत पर है जिसकी सीढ़ियाँ घर के अंदर और बाहर दोनों तरफ़ से है। बुढ़े मियाँ-बीवी सीढियाँ कभीए चढ़ते नहीं है घुटने के दर्द
की वजह से तो मैं वहीं गायब हो गई शादी के एक रात पहले से और फ़िर विदाए के समय प्रकट हो गई ;-)
रौड: अच्छा तुम्हारी चुदाई की कहानी बाद में सुनुँगा, पहले यह बताओ कि तेरी भाभी ऐसा क्या कही कि तुम इस तरह से शादी
वाले घर से गायब हो कर चुदाने चली गई अकेली, एक अलग रूम में।
मैं: वो तो उसीदिन पहली बार मुझसे सेक्स संबंधी बात की जिस दिन मैंने सुना था कि भैया को हम बहनों की फ़िक्र नहीं है।
अगले दिन ही भाभी मुझे दोपहर को गप्प करते हुए बताई कि जानती हैं रिया जी, आपके भैया के दोस्त लोग आप पर लाईन
मारते हैं। मैंने कुछ खास ध्यान नहीं दिया था तब और कह दिया कि हाँ, यह सब तो लडकों का काम ही है। इसके बाद भाभी
जरा साफ़ बात की और कही कि आप बात समझ नहीं रहीं हैं, रमन बता रहे थे कि उनके दोस्त लोग आपको लेकर बातें करते
हैं और अपना हिलाते भी हैं। मुझे सुनकर अच्छा लगा, पर मैं कैसे भाभी के सामने मान लेती, तो नादान बनते हुए पूछी कि
बात करते हैं तो ठीक है, पर यह हिलाते हैं मतलब क्या?
रौड: स्मार्ट गर्ल... आगे?
मैं: वो अब थोड़ा खुल कर बोली कि समझ लीजिए क्या हिलाते हैं, आपके भैया तो रात में उसी की मदद से मेरा कचूमर निकाल
देते है। मैं बोली, अच्छा... वो बात... अब समझी। आपका जब कचूमर बन रहा होता है तो आप इतना हल्ला क्यों करती हैं,
मेरी नींद खराब हो जाती है। वो अब बहुत जोर शर्माई और बोली, हाय राम... मैं तो कितना कोशिश करती हूँ कि आवाज बाहर
न जाए, पर आपके भैया को ही जोश चढ़ जाता है... पूरे सप्ताह का कसर उसी दो रात में निकालना रहता है उनको। मेरी
आवाज नहीं आती होगी आपको...?
रौड: हा हा हा... तुम भी कम बडी गुन्डी चीज नहीं हो रिया... अच्छा फ़िर क्या हुआ?
मैं: मैंने बताया उनको कि रात में उनकी बात अगर न भी सुनाई दे बीच-बीच में तब भी बिस्तर का चड़मड़ाना और उन के कमरे
से आती थप-थप की आवाज से सब पता चलता रहा है कि कब क्या हो रहा है। खुद तो आपलोग शान्त हो जाते हैं और मेरी
नींद रात भर के लिए खुल जाती है ;-( हर रात यह सब जरुरी है क्या?
रौड: गुड क्वेश्चन.... वो क्या बोली फ़िर?
मैं: वो सब दोष भैया पर मढ दी और खुद भोली बन गई कि उसका यहाँ ससुराल में पति के सामने क्या जोर चलेगा, वो भी सेक्स
के विषय में... वो बोली कि शादी की हूँ तो पति को खेलने के लिए बदन तो देना पडेगा न। फ़िर वो मुझसे पूछी कि मैं ऊँगली
करती हूँ कि नहीँ... और मेरे यह कहने पर की ऊँगली भीतर नहीं घुसाती सिर्फ़ ऊपर-ऊपर रगड़ कर शान्त हो लेती हूँ वो बोली
कि ऊँगली भीतर डाला कीजिए.... धीरे-धीरे आदत हो जाएगा। लडकियों की ऊँगली पतली होती है तो कोशिश कीजिएगा तो चला
जाएगा। मेरी मम्मी बताई थी जब शादी ठीक हो गई तो कि ऐसे ऊँगली दालने की आदत रहेगी तो फ़िर जब पति डालेगा तो
तकलीफ़ कम होगी। मुझे तो दो ही महिना मिला था, आप अभी से शुरु कर दीजिए।
रौड: यार तुम्हारी रिचा की मम्मी तो बहुत स्मार्ट है, अपनी बेटी को पूरा समझा के भेजी थी... गुड।
मैं: हाँ... और फ़िर वो मुझे अपने कमरे में ले गई और फ़िर वो मुझे दिखाई अपनी चूत और बोली कि देखिए दो सप्ताह हुआ है
और कैसा खुल गया है, आई थी तो एक ऊँगली डालने में कराह निकल जाती थी और अब देखिए दो ऊँगली आरम से चला
जाता है और उसने मुझे दिखा कर अपनी दो ऊँगली भीतर डाल ली और बोली कि अगर तेल लगा कर कोशिश करुंगी तो शायद
तीन भी भीतर चला जाएगा।
रौड: वाओ... क्या बात है...
मैं: फ़िर उन्होंने मुझे भी कहा कि मैं अपने चूत में ऊँगली डालने की कोशिश करूँ और मुझे भी लगा कि यही सही समय है तो मैंने
भी कोशिश की और फ़िर जब हल्का दर्द हुआ तो हटा ली, तब भाभी ने कहा कि आप आराम से लेटिए मैं कर देती हूँ और
फ़िर वो मेरे ऊपर के हिस्से को रगडते हुए चूत को गीला की और फ़िर अपना ऊँगली एकबार में ही घुसा दिया, हल्का दर्द हुआ
पर मेरी चूत उँगली के लिए उस दिन खुल गई।
रौड: अच्छा, फ़िर तो तुम दोनों का रिश्ता ननद-भाभी से कुछ ज्यादा ही बडा है... ;-)
मैं: हाँ.... इसके बाद हम रोज दोपहर में थोडी देर के लिए भाभी के कमरे में चले जाते और फ़िर अपनी-अपनी गर्मी शान्त करते।
भाभी ही बोली कि जब तक उनकी शादी नहीं हुई थी, वो सप्ताह-दस दिन पर ऊँगली करती थीं, पर तो जब से चुदाई का चस्का
लगा है हर दम बस चूत से खेलने का मन करता रहा है। मुझे भी अब ऐसा ही लगता जब से ऊँगली भीतर डाल कर मस्ती
करने लगी थी। अब हम दोनों भी खुब गन्दी बातें करने लगे।
रौड: चलो तुम्हारे लिए तो यह अच्छा ही हुआ।
मैं: हाँ... फ़िर एक दिन भाभी बोली कि अगर उनको पता होता कि चुदाई में ऐसा मजा आता है तो वो कब का चुदवा लेती और
फ़िर मुझे बोली कि आप रिया अब शुरु कर दीजिए... जवानी के दिन बेकार मत कीजिए, समय जो बीत जाएगा फ़िर नहीं लौट
के आएगा। मैंने भी तब जवानी के जोश में बोल दिया कि किसके साथ कर लूँ... ऐसे ही किसी से थोडे ना कह सकती हूँ,
आपकी तो शादी हो गई है, पर मेरी जब होगी तब ना।
रौड: सही बात...गुड, वो क्या बोली?
मैं: वो मेरी चूत को चाटते हुए बोली कि आप रेडी होईए तो एक शनिवार आपको बुला लेती हूँ कमरे में... रोहन को कोई परेशानी
नहीं होगी। पहले मैं रोहन से चुदवा लूँगी और तब आप सब देख समझ लीजिएगा फ़िर इसके बाद रोहन आपको भी चोद देगा।
ऐसे भी रोहन बिना दो बार दाले सोता नहीं है तो उसी दो बार में हम दोनों एक-एक बार शेयर कर लेंगे। ज्यादा टाईम नहीं
लगता है बीस-पच्चीस मिनट बहुत है... फ़िर आप अपने कमरे में सो जाईएगा।
रौड: अच्छा... फ़िर तुम क्या कही?
मैं: मैंने मना कर दिया कि यह नहीं होगा मुझसे... वो मेरे भैया हैं और वो भी नहीं मानेंगे। तब भाभी खुल कर बताई कि आपके
भैया तो अपने दोस्तों के साथ आपके बारे में बात करते हुए साथ में निकालते हैं। भाभी और मैं रोज ऐसे ही बात करते हुए
लेस्बीयन सेक्स करने लगे। इसी दौरान भाभी बोली कि न होगा तो वो मुझे अपने भैया के साथ कर देगी फ़िर मुझे सब संभाल
लेना था। उनकी यह बात मुझे जँच गई कि इस तरह मुझे इसका अनुभव भी हो जाएगा और बात कहीं फ़ैलेगी भी नहीं।
रौड: तुम्हारी भाभी तो यार गजब की सेटर निकली।
मैं: मेरी भाभी लाखों मे एक है :-)
रौड: हाँ... यार यह तो है। अच्छा तो इसी प्लान से तुम गई ही थी। अच्छा ... फ़िर वो अपने भाई से कैसे तुमको सेट कर दी?
मैं: बताया न मैंने अपने तरफ़ की देहाती कहावत। अपने भाई को अकेले में मेरे पास लाई और बोली कि भैया रिया आई है तो
घुमा फ़िरा दीजिए थोडा... आपके बहनोई की बहन है, तो और किसी के साथ कैसे जाएगी। बाकी आपलोग प्लान कर लीजिए
दस मिनट में और मुझे बता दीजिए क्या कैसे करना है। ख्याल रहे कि कभी घुमी नहीं है किसी लडका के साथ... और फ़िर वो
वहाँ से चली गई।
रौड: गजब.... फ़िर?
मैं: फ़िर क्या, वो बताए कि दो दिन बाद शाम को पूजा होने के बाद रात में वो मुझे ले कर यहाँ से निकल जाएँगे और फ़िर वो
रात और अगले दिन जो शादी का दिन है और फ़िर उस रात को मौझे उसी कमरे में रह्ना होगा और वो बीच-बीच में यहाँ आते
रहेंगे और मेरे लिए खाना वगैरह का एंतजाम करते रहेंगे और फ़िर एकदम सुबह मुझे ले कर पहुँच जाएँगे। यह पूरा शादी का
दो दिन का कार्यक्रम एक अलग हौल से था और उसके आस-पास के होटलों में कुछ रूम गेस्ट के लिए रखा गया था सो उन दो
दिनों में किसी को समझ में नहीं आया कि कौन किधर ठहरा हुआ है और हमने इसीबात का फ़ायदा उठाया।
रौड: ओह... बहुत मजेदार वाकया है... पर अब मुहे जाना होगा। एक अर्जेम्ट मीटिंग का कौल आ गया है एक हौस्पिटल से। कल
बात करें... यही समय।
मैं: ठीक है... मैं भी थक गई हूँ ऊँगली करते-करते। कल मिलते हैं.... बाय
रौड: बाय बेबी....


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