भाई बहन का हनीमून
मेरी माँ संगीता और कजिन मौसी रेवती दोनों एक ही गली में रहती हैं। मेरे भाई का नाम राजवीर और मेरा नाम अंजलि है। मौसी की लड़की का नाम तन्वी और लड़के का नाम योगेन्द्र है। मेरा और योगेन्द्र का और तन्वी और राजवीर का विवाह हो चुका है।



योगेन्द्र स्टेट बैंक में काम करता है और राजवीर बैंक आफ बरोडा में आफिसर है, दोनों की उमर कोई 25 साल के करीब है और मैं और तन्वी देल्ही में एक पब्लिक स्कूल में टीचर्स हैं और हमारी उमर 23 और 22 साल है, शादी से पहले तो मैं योगेन्द्र को भैया कहती थी और तन्वी राजवीर को भैया कहती थी, लेकिन हमारी शादी के बाद सब कुछ बदल गया।



मैं तो योगेन्द्र के लण्ड की दीवानी हो चुकी हूँ। मुझे योगेन्द्र बहुत पसंद है बस वो जरा अधिक ही जेंटलमैन बनता है और मेरी हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करता है। योगेन्द्र का लण्ड 6” इंच का है लेकिन बहुत ही कड़ा रहता है। योगेन्द्र का कद 6 फीट है और वो दिखने में बहुत ही खूबसूरत है और मैं एक साँवली औरत हूँ, मेरी चूची काफी बड़ी है और मेरा पति मेरे निपल्स को बहुत प्यार से चूमता है। मेरा कद 5’6” है और मेरे चूतड़ बहुत आकर्षक हैं, ये मुझे मेरा पति बताता है।



मेरा पति अक्सर मेरे चूतड़ों को किस करता है और ऐसा करने से वो काफी उत्तेजित हो जाता है, कई बार योगेन्द्र ने मेरी गाण्ड मारने की इच्छा जाहिर की है, लेकिन मैंने उसको इजाजत नहीं दी है। मुझे अपने पति का लण्ड चूत में ही बहुत मजे देता है तो गाण्ड मरवाने का क्या फायदा?



मेरे भैया राजवीर भी तन्वी को बहुत प्यार करते हैं और उनकी आपस में बहुत पटती है। तन्वी भी बहुत सेक्सी है बस उसका शरीर मुझसे अधिक भरा हुआ है। उसका गदराया हुआ बदन देखकर कई बार मेरे पति की नजर भी अपनी बहन की चूची और गाण्ड पर चली जाती है।



जिसका दोष मैं अपने पति को नहीं देती। अगर तन्वी के जिश्म का मजा मेरे भैया की किश्मत में लिखा है तो कोई क्या कर सकता है।




एक दिन योगेन्द्र और तन्वी हमारे घर आए हुए थे और राजवीर और योगेन्द्र शराब पी रहे थे। तन्वी उनको खाने के लिए स्नैक्स देने गई तो योगेन्द्र का हाथ तन्वी के गुदाज चूतड़ों को छू गया तो मैंने देखा की उसका लण्ड एकदम से तन गया।



तन्वी को जब इसका एहसास हुआ तो वो शर्मा गई। उस रात जब मेरा पति मुझे चोद रहा था तो बार-बार मुझे गाण्ड मरवाने के लिए कह रहा था। मैंने जब मना कर दिया तो वो मेरे चूतड़ों को चूमने लगा और मेरी गाण्ड में जुबान घुसाकर अंदर-बाहर करने लगा। मुझे पता चल गया था की मेरे पति के मन से अभी अपनी बहन के चूतड़ों के स्पर्श का एहसास गया नहीं था।



योगेन्द्र मुझे पसंद करता था और कभी-कभी मेरी 36सी की चूचियों को मौका देखकर दबा देता था। एक दिन जब वो सनडे को मेरे घर आया तो राजवीर मौसी के घर के लिए रवाना हो चुका था। मैंने योगेन्द्र को बताया की भैया तो उनके घर उनसे मिलने गये हैं।

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अपने भैया/संया का तगड़ा लंड

उसने मुझे बाहों में भर लिया और कहने लगा- “मैं तो तुमसे ही मिलने आया हूँ, राजवीर से नहीं, अब मैं तुझे दूर से देखकर और तड़पना नहीं चाहता, तुझसे प्यार करता हूँ और शादी करना चाहता हूँ, बोलो मंजूर है तुझे?”



मैं मुश्कुराकर बोली- “योगेन्द्र भैया, यह सब तो ठीक है लेकिन माँ को क्या बोलूँगी मैं, की मैं योगेन्द्र भैया से शादी करना चाहती हूँ…”



योगेन्द्र अपनी जिद दिखाते हुए बोला- “तुझे बार-बार मुझे भैया कहना क्यों अच्छा लगता है? मैं तेरा मौसेरा भाई हूँ कोई असली नहीं, और शादी की बात मैं खुद मौसी से कर लूँगा, तुम बस यही कह देना की तुझे ये शादी मंजूर है, ओके?”



उसी दिन शाम को माँ और मौसी ने जब यह सुना तो वो हमारी शादी के लिए मान गईं।



तभी राजवीर भैया और तन्वी बाहर से आए तो माँ ने पूछ लिया- “क्यों बेटे राजवीर, अगर तुम चाहो तो तेरी और तन्वी की भी शादी करा दी जाए? योगेन्द्र और अंजलि तो कर ही रहे हैं, तुम एक दूजे के साले भी बन जाओगे और जीज़्जा भी… घर की बात घर में रह जाएगी। हम किसी बाहर के आदमी पर इतना विश्वास भी नहीं कर सकते…”



तन्वी शर्मा गई और राजवीर मुश्कुरा पड़ा। मुझे तो पहले ही पता था की वो दोनों भी एक दूसरे को प्यार करते हैं। इस तरह हम लोगों की शादियां एक ही दिन हो गईं। मुझे अपनी खुशकिश्मती पर विश्वास नहीं हो पा रहा था। मैंने और योगेन्द्र ने सुहगरात बड़े मजे से मनाई और चुदाई का खूब आनंद लिया। तन्वी भी अगले दिन काफी खुश नजर आ रही थी।



जब मैंने तन्वी को रात के बारे में पूछा तो वो शरमाते हुए बोली- “तेरा भाई तो एकदम से जानवर है, ही इज आ बीस्ट, योउ नो… देखो मेरा क्या हाल कर दिया है? मैं तो ठीक से चल भी नहीं पा रही हूँ, राजवीर ने मेरी चूत की बुरी हालत बना दी है। उसका लण्ड क्या कोई आम लण्ड है, कम से कम 8 इंच का होगा और मैं बेचारी कमसिन लड़की, तेरे भैया को तो कोई मस्त रंडी औरत चाहिए जो उसकी वहशत को झेल सकती हो। मुझे तो उसने सारी रात सोने नहीं दिया। मेरी चूत सारी रात पानी बहाती रही और चुदती रही। यह देखो मेरी चूची का क्या हाल हुआ है?”

फिर तन्वी ने मुझे अपने गाउन के नीचे से अपनी चूचियां दिखाते हुए कहा- “देखो, तेरे भैया ने कैसे काट खाया है मुझे, साला दाँत ऐसे मारता है जैसे चोदना नहीं खाना चाहता हो मुझे, लण्ड तो इतनी जोर से पेलता है राजवीर की सारा शरीर हिल जाता है। मेरी चूत भी सूजी पड़ी है, मुझे कम से कम दो दिन का आराम चाहिए तेरे भैया की चुदाई से। तू सुना योगेन्द्र की चुदाई कैसी है?”



मैंने तन्वी को सब बता दिया की योगेन्द्र बहुत प्यार से चुदाई करता है और चूमता है। मुझे बहुत मजा आता है।



तन्वी हँस पड़ी और बोली- “चलो तुझे तो मेरा भाई खुश कर देता है। काश… मुझे भी कोई ऐसा ही मर्द मिलता जो आराम से प्यार से मेरी चुदाई करता? योगेन्द्र का लण्ड कितना बड़ा है? राजवीर का तो कम से कम 8 इंच का होगा, मेरा तो हाल बुरा कर दिया है…”



मैंने तन्वी को बताया की योगेन्द्र का तो केवल 6” का है।



तो वो बोली- “मुझे तुमसे जलन होने लगी है, काश… मेरे पति का लण्ड भी 6” का होता और मुझे तकलीफ ना होती चुदाने में…”



मैंने हँसते हुए मजाक किया- “तो फिर ठीक है, हम अपने पति बदल लेते हैं, तुम अपने भाई से चुदाई करवा लो और मैं अपने भाई से चुदवा लेती हूँ, क्यों क्या ख्याल है?”



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