झंडाराम और ठंडाराम - सेक्स का गेम खेला अपनी पत्नियों के साथ
हम झंडाराम और ठंडाराम दोनों सगे भाई हैं. हम दोनों एक साथ मिलकर हर काम किया करते हैं फिर वह काम भले ही चोरी-डकैती का हो या अपनी-अपनी महबूबाओं के साथ रंगरेलियां मनाने का हो. बचपन से ही हमारी शक्लें भी बिलकुल एक जैसी हैं. कई बार तो हमारी पत्नियाँ तक हम दोनों में अंतर नहीं कर पातीं अत: हम दोनों अपनी पत्नियों के साथ मिलकर सेक्स का गेम खेला करते हैं.


जब हमने अपनी सुहागरातें मनाई तो भी दोनों ने एक साथ मिलकर मनाई. जब मेरी (अर्थात झंडाराम की) शादी हुई और मैं अपनी पत्नी के सुहागरात वाले पलंग पर पंहुचा तो ठंडाराम पहले से ही वहां मौजूद था. मुझे कुछ पल को एक हल्का सा धक्का भी लगा कि देखो पत्नी मेरी और मजे ले रहा है ठंडाराम. परन्तु फिर मैंने यह सोच कर सब्र कर लिया कि एक दिन जब उसकी शादी होगी तो मैं कौनसा पीछे रह जाऊँगा उसकी पत्नी के साथ मजे लूटने से. मेरी पत्नी सिकुड़ी, डरी-डरी सी घूँघट में मुह छिपाए बैठी थी और ठन्डे उसके पास बैठा उसका घूंघट उठा रहा था. उसने मन-ही मन गुनगुनाना शुरू कर दिया, " सुहागरात है घूंघट उठा रहा हूँ मैं......."


मुझे लगा कि आज की रात तो इसने ही मेरी बीबी को अपने जाल में फाँस लिया. चलो दो घंटो के बाद ही सही आखिर मजे तो में भी मार ही लूँगा. यह सोच कर मैं चुपचाप अपनी पत्नी की सुहागरात का जायजा लेने लगा. अब आगे क्या हुआ यह मैं बाद में बताऊंगा. इस समय तो ठन्डे को अपनी पत्नी पर हाथ साफ़ कर ही लेने दिया जाए. यही सब सोच-विचार कर मैं अलमारी की आड़ मैं छुप कर खड़ा हो गया. यहाँ तक ठन्डे तक को भी इसका आभास नहीं हो पाया. और वह निर्बिघ्न धीरे आगे बढ़ता रहा. वह बेचारी पीछे, पीछे और पीछे हटती रही और फिर आगे बढ़कर ठन्डे ने उसे दबोच ही लिया......


ठन्डे ने उसका घूंघट हटाकर उसका चेहरा देखा तो देखता ही रह गया. अचानक उसके मुंह से निकल ही गया," भाभी, मेरी जान! तुमतो बहुत ही जोरदार चीज निकलीं. हमारे तो भाग ही खुल गए. " भाभी का संबोधन सुनकर दुल्हिन का माथा ठनका. पूछा उसने, "भाभी ? कौन भाभी? तुम मेरे पति होकर मुझसे भाभी क्यों कह रहे हो? " ठन्डे को अपनी गलती का एहसास तुरन्त हो गया. उसने बात घुमाई, " अरे मैं तो यूं ही मज़ाक कर रहा था. देखना चाहता था कि तुम पर इन शब्दों का क्या असर होगा. चलो छोड़ो, बात आगे बढ़ाते हैं." और फिर ठन्डे ने कस कर मेरी पत्नी को अपनी बांहों में भर लिया और उसके ओठों पर अपने ओंठ सटा दिए. पत्नी का यह पहला मौका था. अत: वह बुरी तरह से लजा गयी.

ठन्डे ने पूंछा, "क्यों क्या अच्छा नहीं लग रहा. लो हमने छोड़ दिया

तुमको.अगर तुम्हें यह मिलन की रात पसंद नहीं तो नहीं करेंगे हम

कुछ भी तुम्हारे साथ....." पत्नी बोली, " हमने ऐसा कब कहा कि

हमें यह सब पसंद नहीं. हमतो बस अँधेरा चाहते थे... आप तो यूं ही

नाराज होने लगे.? ठंडा बोला, "इसका मतलब है कि तुम्हें हमारा ऐसा

करना अच्छा लगा." दुल्हिन ने स्वीकृति से सिर हिला दिया. लेकिन

ठंडा बोला, " अगर हमने लाईट बुझा दी तो हमें तुम्हारी गदराई

जवानी का लुत्फ़ कैसे देखने को मिलेगा? मेरी जान आज की रात भी

भला कोई पत्नी अपने पति से शरमाती है? ये तो होती ही सुहाग

की रात है, इसमें तो पत्नी सारी-सारी रात पति के सामने निर्वस्त्र

होकर पड़ी रहती है, अब ये पति की इच्छा है कि वह उसका जैसे

चाहे इस्तेमाल करे." दुल्हिन चौंक उठी. बोली, " जैसे चाहे इस्तेमाल

करे, इसका मतलब क्या है. हम कोई चीज लग रहे हैं तुमको?" ठंडा

घबरा उठा. बोला, " चीज नहीं न, तुमतो हमारी सबकुछ लग रही हो

रानी. मेरी जान, बस अब तो हम से लिपटा-चिपटी कर लो. " ऐसा

कहते के साथ ही ठंडा उसे दबोचे उसके ऊपर छाने लगा.

"पहले लैट बंद करदो हाँ, बरना हम कतई ना सो पाएंगे तुम्हारे

साथ...." देखो रानी, तुम्हें हमारी किसम, आज हमें अपने चिकने

गोरे-गोरे बदन का जायजा लेने दो न, आज हम लोग रौशनी में ही

सब काम करेंगे और देखेंगे भी तुम्हारे नंगे, गोरे बदन को. अगर तुम्हें

पसंद नहीं है तो हम जाते हैं..समझ लेंगे हमारी शादी ही नहीं हुई है.

" ऐसा कह कर ठंडा पलंग से उठ खड़ा हुआ तभी दुल्हिन ने लपक

कर उसका हाथ पकड़ लिया. बोली, अच्छा चलो, पहले एक वादा करो

कि तुम हमें ज्यादा परेशान तो नहीं करोगे...जब हम कहेंगे हमें छोड़

दो तो छोड़ दोगे न?" "हाँ, चलो मान ली बात." ऐसा कहकर ठन्डे

ने कहा, " अब तुम सबसे पहले अपना ब्लाउज उतारो. और उसके

बाद, अपनी ब्रा भी. आज हम तुम्हारे सीने का नाप लेंगे. "
दुल्हिन खिलखिलाई, बोली- "दर्जी हो क्या, जो हमारे सीने का नाप लोगे." "ठीक है , मत उतारो, हम तो चले, देखो कभी झांकेंगे भी नहीं तुम्हारे पास. अच्छी तरह से सोच लेना." दुल्हिन शरमाते हुए बोली, "हम नहीं उतारेंगे अपनी चोली और ब्लाउज, ये काम तुम नहीं कर सकते. हम अपनी आँखें बंद कर लेते हैं." ठंडा पलंग से उठा ही था कि फिर बैठ गया. बोला, " चलो, हम ही तुमको नंगा किये देते हैं." ऐसा कहकर उसने दुल्हिन के ब्लाउज के हुक खोलने का प्रयास किया. दुल्हिन बोली, " ना जी ना, हम नंगे नहीं होंगे तुम्हारे सामने." "फिर किसके सामने नंगी होगी? अपने बाप के सामने ! जाओ नहीं देखना तुम्हारा नंगा बदन. सोती रहो अकेली ही रात भर...मैं तो चला. "

दुल्हिन ने उसको इसबार फिर से रोक लिया. बोली, " चलो हम हार गए. लो पड़ जाते हैं तुम्हारे सामने, अब जो जी में आये करते रहो..." दुल्हिन सच-मुच ठन्डे के आगे अपने दोनों पैरो को फैलाकर चित्त लेट गयी. ठन्डे ने दुल्हिन का ब्लाउज उतार फैंका और फिर उसकी ब्रा भी. अब उसकी गोरी-गोरी छातियाँ बिलकुल नंगी हो गयी थी. ठन्डे ने उन्हें धीरे-धीरे मसलना शुरू कर दिया. अभी उनकी घुन्डियाँ मुंह में डाल कर चुंसता तो कभी उन्हें अपनी हथेलियों में भर कर दबाता. बेचारी दुल्हिन अपनी दोनों आँखों पर हथेलियाँ टिकाये खामोश पड़ी थी. मुंह से दबी-दबी सी सिसकियाँ निकल रहीं थीं.


अब ठन्डे के हाथ और भी आगे बढ़ चले. नाभि से नीचे हाथ फिसलाकर उसने दुल्हिन के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया. दुल्हिन उसी भांति निचेष्ट पड़ी रही. उसने अपनी दोनों हथेलियाँ अपनी आँखों पर और जोरों से कस लीं. ठन्डे ने उसकी साडी और पेटीकोट दोनों ही उसके शरीर से अलग कर दिए. अब दुल्हिन उसके आगे नितांत निर्बसन पड़ी थी. ठन्डे ने उसके नग्न शरीर को चूमना शुरू कर दिया. ऊपर से लेकर नीचे तक . अर्थात चुम्बन का सिलसिला ओठों से शुरू हुआ और धीरे-धीरे ठोढ़ी, गर्दन, वक्ष, पेट आदि सभी स्थलों से गुजरता हुआ नाभि से नीचे की ओर उतरने लगा.


दुल्हिन अबतक काफी गरमा चुकी थी. उसके मुंह से विचित्र सी आवाजें निकल रहीं थीं. अब ठन्डे ने भी अपने कपडे उत्तार फैंके और बिलकुल निर्बसन हो कर दुल्हिन से आ चिपटा. उसे अपने बांहों में भरते हुए ठन्डे ने पूछा," अब बताओ, मेरी रानी, मेरी जान ! कैसा लग रहा है अपना यह मिलन?... अच्छा लग रहा है न? " दुल्हिन ने हल्का सा सिर को झटका देकर स्वीकृति दी. ठन्डे ने तब दुल्हिन की दोनों टाँगे फैला कर असली मुकाम को देखने का प्रयास किया. दुल्हिन भी इतनी गरमा चुकी थी कि उसने तनिक भी विरोध न किया और अपनी दोनों टांगों को इसतरह फैला दिया कि ठन्डे को ज्यादा कुछ करने की जरूरत ही न पड़ी . "वाह! कितना प्यारा है तुम्हारा यह संगमरमरी बदन, जैसे ईश्वर ने बड़ी फुर्सत में बैठ कर ढ़ा हो इसे. मेरी रानी, बस एक ही बात अखर रही है इसमें...." क्या ? ...." दुल्हिन ने झट से पूछा. ठंडा बोला, " तुम्हारी जाँघों के बीच के ये काले ,घने, लम्बे-लम्बे बाल. इसमें तो कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है. तुमने शादी से पहले कभी इन्हें साफ़ नहीं किया. "चल हट!" दुल्हिन ने शरमाते हुए कहा, "हमें ऐसी बातें कौन बताता भला..." क्यों क्या तुम्हारी भाभियाँ नहीं हैं क्या.... ये सारी बातें तो भाभियाँ ही ननदों को शादी से पहले समझाती हैं..."


"ठीक है, इन बालों को अभी साफ़ करके आओ . तब आगे सोचेंगें कि क्या करना है. " दुल्हिन बोली, " हमसे यह सब नहीं होगा.... हमने आज तक जो काम किया ही नहीं, एकदम से कैसे कर लेंगें." तब तो हमें ही इन्हें साफ़ करना पड़ेगा. ऐसा कहकर ठन्डे उठा और एक रेजर ले आया और बोला चलो, फैलाओ अपनी दोनों टांगें. बिलकुल एक दूसरे से हटाकर. बिलकुल चौपट कर दो." "हाय राम, कैसी बातें करते हो.... नहीं हमें तो बहुत शर्म आ रही है." दुल्हिन एक दम लजा गयी. ठन्डे ने उठकर दुल्हिन की दोनों जांघें चौड़ी कर दीं और रेजर से योनी पर उगे बालों को साफ़ करने लगा. दुल्हिन ने अधिक विरोध तक नहीं किया. और शांत पड़ी अपने बाल साफ़ करवाती रही. ठन्डे ने उसकी चिकनी योनी पर हाथ फेरा और आहें भरता हुआ बोला, " आह! कितनी प्यारी है तेरी, कतई गुलाबी, बिलकुल बालूसाही जैसी. दिल करता है खा जाऊं इसे...." ऐसा कहते के साथ ही ठन्डे ने अपना मुंह दुल्हिन की जाँघों के बीचोबीच सटा

दिया और चाटने लगा. दुल्हिन के मुंह से सिसकारियां फूट पड़ीं . सीई...आह,,, छोड़ो..क्या करते हो...कोई देख लेगा तो क्या कहेगा....." "क्या कहेगा....अपनी बीबी के जिस्म को चूम-चाट रहे हैं. कौन नहीं करता यह सब? हम क्या अनोखा काम कर रहे हैं.." कहते हुए ठन्डे ने एक ऊँगली दुल्हिन के अन्दर कर दी. दुल्हिन मारे दर्द के कराह उठी. "हाय राम, मर गई मैं तो.....ऊँगली निकालो बाहर, मेरी तो जान ही निकली जा रही है...."
ठन्डे को दुल्हिन का इसतरह तड़पना बड़ा अच्छा लगा. वह और जोरों से ऊँगली अन्दर-बाहर करने लगा. दुल्हिन पर तो जैसे नशा सा छाने लगा था. उसकी आँखें मुद्सी गई और वह अपनी कमर व् नितम्बों को जोरों से उछालने लगी. ठन्डे ने पूछा , " सच बताओ, मज़ा आ रहा है या नहीं? " दुल्हिन ने अपनी दोनों बाँहें ठन्डे के गले में डाल दीं और अपना मुंह उसके सीने में छुपा लिया. " छोड़ो कोई देख लेगा तो...." दुल्हिन बांहों में कसमसाई. ठन्डे बोला, " फिर वही बात, अगर कोई देखे तो अपनी माँ को मेरे पास भेज दे....देखे तो देखे भूतनी वाला......." हम तो तुम्हारा नंगा बदन देख-देख कर ही सारी रात काट देंगें." ठन्डे ने दुल्हिन का एक हाथ पकड़ा और अपनी जाँघों के बीच ले गया. दुल्हिन को लगा कि कोई मोटा सा बेलन उसके हाथों में आ गया हो, किन्तु बेलन और इतना गर्म-गर्म, उसने घवरा कर अपना हाथ वापस खींच लिया और ठन्डे से नाराज होती हुई बोली, " छोड़ो, हमें ऐसी मजाक हमें बिलकुल अच्छी नहीं लगती..." अच्छा जी, ऊँगली डालने वाला मजाक पसंद नहीं और जब आठ इंच का यह मोटा हथियार अन्दर घुसेगा तो कैसे बर्दास्त करोगी. अभी देखना तुम्हारा क्या हाल होगा. देखना जरा इसकी लम्बाई और मोटाई..." ऐसा कहकर ठन्डे ने अपना मोटा लिंग दुल्हिन के हाथ में थमा दिया. दुल्हिन प्रतियुत्तर में मुस्कुराई भर , बोली कुछ भी नहीं. झंडाराम अभी तक अलमारी की आड़ में छुपा सब कुछ बड़े ध्यान से देख रहा था और सोच रहा था कि कब ठन्डे अपना काम ख़त्म करे और फिर उसकी बारी आये.


उसे ठन्डे पर अब क्रोध आने लगा था कि वह क्यों फ़ालतू की बातों में इतना वक्त बर्बाद कर रहा था. जल्दी से पेल-पाल कर हटे वहां से . उसका पेन्ट खिसककर घुटनों से नीचे आ गिरा था और उसने अपना बेलनाकार शरीर का कोई हिस्सा बाहर निकल रखा था जिसे वह हाथ फेर कर शांत करने का प्रयास कर रहा था. इधर ठन्डे का भी बुरा हाल था. उसने दुल्हिन की आँखों से उसके हाथ हटाये और बोला, " देखो जी अब हमें कतई बर्दास्त नहीं हो पा रहा है. अभी तक तुम अपनी आँखें बंद किये पड़ी हो. अब तो तुम्हें
हमारा भी देखना पड़ेगा. आँखें खोलो और इधर देखो हमारे इस हथियार को, जो अभी कुछ ही देर में तुम्हारी इस सुरंग में अन्दर घुसने वाला है. फिर यह न कहना कि मुझे तुमने बताया ही नहीं." दुल्हिन ने कनखियों से ठन्डे के नग्न शरीर की ओर देखा तो देखती ही रह गई . करीबन आठ-दस इंच का मोटा बेलन सा ठन्डे का हथियार देख कर दुल्हिन मन-मन काँप उठी, किन्तु बोली कुछ भी नहीं और एक तक उसी को निहारती रही. ठन्डे ने चुस्की ली," क्यों, पसंद आया न हमारा यह मोटा, लम्ब-तडंग सा हथियार? अब से इस
पर तुम्हारा पूरा अधिकार है. तुम्हें ही इसकी हर इच्छा पूरी करनी होगी. ये जो-जो मांगे देती जाना." दुल्हिन चिहुंक उठी, " यह भी कुछ मांगता है क्या?" "हाँ, यह सचमुच मांगता है....अच्छा इसे पकड़ कर धीरे-धीरे सहलाकर इससे पूछो तो बता देगा कि इसे क्या चाहिए...."
दुल्हन ने डरते-डरते उसे थामा और उसे सहलाने का प्रयास किया कि वह फनफना उठा, जैसे कोई सांप फुंकार उठा हो। पर दुल्हन ने जरा भी हिम्मत न हारी और उसे आहिस्ता-आहिस्ता सहलाने लगी। दुल्हन को भी अब मज़ा आने लगा था वह सारा डर भूल कर उसे सहलाने में लगी थी।

ठन्डे ने दुल्हन से अपनी दोनों जांघें फैलाकर चित्त लेट जाने को कहा और फिर उसकी जाँघों के बीच में आ बैठा। ठन्डे ने अपने हथियार को धीरे से उसकी दोनों जाँघों के बीच में टिका दिया और उसे अंदर घुसेड़ने का प्रयत्न करने लगा।

दुल्हन की साँसें तेज चलने लगीं। उसका अंग-अंग एक विचित्र सी सिहरन से फड़कने लगा और वह उत्तेजना की पराकाष्ठा को छूने लगी। अब वह इतनी उत्तेजित हो उठी थी कि ठन्डे के क्रिया-कलापों का भी विरोध नहीं कर पा रही थी। अब उसे बस इन्तजार था तो केवल इस बात का कि देखें ठन्डे का हथियार जिसे उसने अपनी दोनों जाँघों के बीच दबा रखा था, उसकी सुरंग में जा कर क्या-क्या गुल खिलाने वाला है। यह तो वह भी जान चुकी थी कि ठन्डे अब मानने वाला तो था नहीं, उसका तन-तनाया हुआ वह मोटा, लम्बा हथियार अब उसके अन्दर जाकर ही दम लेगा। अत: दुल्हन ने आतुरता से अपनी दोनों जाँघों को, वह जितना फैला और चौड़ा कर सकती थी उसने कर दिया ताकि ठन्डे का हथियार आराम से उसकी सुरंग में समा सके। हालांकि यह दुल्हन का पहला-पहला मौका था। इससे पूर्व उसे किसी ने छुआ तक नहीं था।

वह जब फिल्मों में सुहागरात के दृश्य देखती थी तो उसका दिल कुछ अजीब सा हो जाता था। परन्तु आज उसे इतना बुरा भी नहीं लग रहा था। उसकी आँखें हल्की सी मुंदती जा रहीं थीं। इसी बीच ठन्डे ने अपना तनतनाया हुआ डंडा दुल्हन की दोनों जाँघों के बीच की खाली जगह में घुसेड़ दिया। एक ही झटके में पूरा का पूरा हथियार सुरंग के अन्दर जा घुसा जिससे सुरंग में भारी हलचल मच गई।दुल्हन को लगा कि किसी ने उसके अन्दर लोहे का गर्म-गर्म बेलन पूरी ताक़त से ठोक दिया हो, वह दर्द से तड़प उठी और ठन्डे के डंडे को हाथों से बाहर निकालने की कोशिश करने लगी। मगर ठन्डे था कि जोरों से धक्के पे धक्का मारे जा रहा था।

दुल्हन की सुरंग से खून का फव्वारा फूट पड़ा। ठन्डे ने लोहे के बेलन जैसे हथियार से दुल्हन की सुरंग को फाड़ कर रख दिया था। वह बराबर सिसकियाँ भरती हुई दर्द से छटपटा रही थी। लेकिन ठन्डे था कि रुकने का नाम नहीं ले रहा था। करीब आधा घंटे की इस पेलम-पेल में ठन्डे कुछ ठंडा पड़ा और अंत में उसने ढेर सारा गोंद जैसा चिपचिपा पदार्थ दुल्हन की फटी सुरंग में उड़ेल दिया और उसके ऊपर ही निढाल सा हो कर लुढ़क गया।

दुल्हन अभी भी बेजान सी पड़ी थी पर अब उसका दर्द कम हो चुका था। एक नजर उसने ठन्डे के डंडे पर डाली जो सिकुड़ कर अपने पहले के आकार से घट कर आधा रह गया था। थोड़ी देर बाद ठन्डे उठा और बाथरूम की ओर चला गया। ज्यों ही ठन्डे बाथरूम में गया कि झंडे को मौका मिलगया और उसने लपक कर ठन्डे की जगह ले ली। दुल्हन को शक हो पाता इससे पूर्व ही झंडे ने अपनी पोजीशन ले ली और दुल्हन के नग्न बदन से चिपट कर सोने का बहाना करने लगा। दुल्हन फिर से गरमा गई। उसे इस मिलन में दर्द तो हुआ लेकिन उसे बाद में बड़ा अच्छा लगा।

झंडे बोला,”रानी, आज हम जी भर के तुम्हारी नंगी देह से खेलेंगे। तुम्हारी इसकी (उसने योनि पर हाथ सटाते हुए) आज एक-एक परत खोल कर देखेंगे।”

ऐसा कहकर उसने योनि को सहलाना शुरू कर दिया। अब दुल्हन शर्माने के बजाए उसे अपनी योनि को दिखाने में झंडे का सहयोग कर रही थी। बीच-बीच में वह झंडे के लिंग को भी सहलाती जा रही थी। दोनों ने एक-दूजे के गुप्तांगों से जी भर के खेला।

इसी बीच झंडे बोला,”रानी, एक काम क्यों न करें। आओ, हम एक-दूसरे के अंगों का चुम्बन लें। तुम्हें कोई एतराज तो नहीं है?”

दुल्हन कुछ न बोली। झंडे ने आगे बढ़ कर अपना लिंग दुल्हन के होटों से लगा दिया और बोला,” मेरी जान, इसे अपनी जीभ से गीला करो। देखो फिर कितना मज़ा आएगा। फिर मैं भी तुम्हारी योनि को चाट-चाट कर तुम्हें पूरा मज़ा दूंगा। राम कसम ! ऐसा मज़ा आएगा जिसे जिंदगी भर न भूल पाओगी।”

दुल्हन ने अपना मुँह धीरे से खोल कर झंडे के लिंग पर अपनी जीभ फिराई । सचमुच उसे कुछ अच्छा सा लगा। फिर तो उसने झंडे का सारा का सारा लिंग अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी। उत्तेजना-वश उसके समूचे शरीर में कंपकंपी दौड़ गई। वह अब काफी गरमा गई थी। उसे नहीं पाता था कि पत्नी पति का लिंग मुँह में लेकर चूसती होगी। आज पहली बार उसे इस नई बात का पता चला। झंडे भी काफी उत्तेजित था। लगभग आधे घंटे की चूमा-चाटी के बाद झंडे का वीर्य निकलने को हो गया। उसने कहा,”मेरी जान, मेरा वीर्य अब निकलने वाला है। कहो तो तुम्हारे मुँह में ही झड़ जाऊं?” दुल्हन ने पूछा,”इससे कोई नुक्सान तो नहीं होगा…?”

“नहीं, बिलकुल नहीं। यह तो औरत को ताक़त देता है…”

दुल्हन बोली, “तो चलो झड़ जाओ…”


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