चुदासी भाभी
जयपुर की चुदासी भाभी

हाय फ्रेंड्स, मैं रामू शर्मा जयपुर से हूँ। आपके सामने अपनी एक हिन्दी सेक्स स्टोरी लेकर आया हूँ, बड़ी हिम्मत करने के बाद मैं यह कहानी आपको बताने जा रहा हूँ। यह पिछले साल की बात है।

मेरे पड़ोस में एक परिवार रहता है उसमें भैया.. जिनका नाम अनिल है.. उनकी बीवी सोनिया और उनका 4 साल का बेटा गोलू है।

सोनिया, जिन्हें मैं भाभी कहता हूँ.. क्या मस्त माल हैं यार! उनका फिगर 36-30-36 का है। उनकी उठी हुई गांड देख कर तो समझो हर किसी का लंड खड़ा हो जाए।
जब वो चलती हैं.. तो उनकी गांड ऐसे हिलती है.. जैसे वो बुला रही हों कि आओ और मुझे अपने लौड़े से फाड़ दो।

एक दिन भैया ने मुझे फोन करके बताया कि उन्हें किसी काम से कुछ दिनों के लिए मुंबई जाना है। मुझे उनको स्टेशन तक छोड़ने जाना था तो मैं अपनी कार से उनको साथ ले जाने के लिए तैयार हो गया।

मैं उनके घर गया.. वो तैयार थे। भाभी मेरे लिए पानी लेकर आईं।
हाय क्या मस्त माल लग रही थीं यार.. लौड़ा खड़ा हो गया।

उन्होंने लाल रंग का सूट पहना था। चूड़ीदार पज़ामा.. जो पूरा चिपका हुआ था। वो एकदम सेक्सी माल लग रही थीं।

जब हम जाने को तैयार हुए तो उन्होंने कहा- मैं भी आपके साथ स्टेशन तक चलूंगी.. क्योंकि उनका बेटा नानी के घर गया हुआ था।
भैया ने ‘ओके..’ कहा।

भैया का सामान डिक्क़ी में रख कर मैं ड्राइविंग सीट पर आ गया और भैया मेरे साथ वाली सीट पर बैठ गए, भाभी पीछे बैठ गईं।
बैक मिरर से वो मुझे साफ़ दिख रही थीं.. और मुझे देख कर मुस्कुरा रही थीं।

स्टेशन भैया को छोड़ने हम दोनों ट्रेन तक गए, उनका सामान उनके डिब्बे में रखा।
भैया ने मुझसे कहा- अपनी भाभी का ख्याल रखना.. किसी भी सामान की ज़रूरत हो तो ला देना।
मैंने ‘ओके..’ कहा।

इतने में ट्रेन चल पड़ी, भैया ने हमें बाय किया और ट्रेन आगे बढ़ गई, मैं और भाभी घर के लिए रवाना हो गए।

रास्ते में भाभी ने कहा- मुझे कुछ सामान लेना है।

हम गौरव टावर चले गए, वहाँ पर भाभी लेडीज कपड़ों के शोरूम में चली गईं। मैं बाहर ही रुकने लगा तो भाभी ने मुझे भी अन्दर चलने को कहा- साथ चलो न.. अन्दर तुम मेरी मदद कर देना।

वो मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर ले गईं। अन्दर सेल्स गर्ल थी.. तो एक काउंटर पर जाकर भाभी ने कहा- ब्रा पैन्टी चाहिए।
सेल्स गर्ल ने दिखाईं.. अब भाभी ने कुछ पसन्द की और खरीद ली।
हम घर आ गए.. मैं उन्हें छोड़कर अपने घर आ गया।

सिनेमा हाल में भाभी ने लंड चूसा

अगले दिन भाभी का फोन आया- मैं बोर हो रही हूँ और मुझे मूवी देखना है।
मैंने टाइम निकाल कर शाम को 6 बजे चलने के लिए कहा।

फिर मैंने देखा कि उस दिन कौन-कौन सी मूवी लगी हैं। मुझे ‘मर्डर’ ही ठीक लगी।

हम दोनों शाम को 5.30 बजे फिल्म के लिए रवाना हुए, मैं तो इसी मौके की तलाश में था।
भाभी ने ब्लैक सलवार सूट पहना था, उन्होंने अन्दर ब्रा भी नहीं पहनी थी.. क्योंकि उनके चूचे मस्त हिलते हुए दिख रहे थे। उन्होंने बाल खुले हुए रखे थे और होंठों पर मरून कलर की लिपस्टिक लगाई थी।

हम हॉल में गए.. किस्मत से हमें सबसे पीछे की सीट मिली थीं और आज ज़्यादा भीड़ भी नहीं थी, हॉल में ज़्यादातर कपल ही थे।

मूवी स्टार्ट हुई तो लाइट ऑफ हो गई।
अब हम सब मूवी देख रहे थे। कुछ तो अपने रोमाँन्स में लग गए.. पर मैं डर की वजह से कुछ भी नहीं कर रहा था। मेरा लंड खड़ा हो गया.. अंधेरा होने के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

थोड़ी देर में भाभी ने एक हाथ मेरी जाँघ पर रखा, मैं तो इसी इंतजार में था, भाभी ने धीरे-धीरे मेरी जाँघ को मसलना शुरू किया और हाथ मेरे लंड की तरफ बढ़ाने लगीं।
मैं अभी तक शांत था।

फिर भाभी ने दूसरे हाथ से मेरा हाथ पकड़ कर अपने मम्मों पर रख कर दबवा लिया और मेरे लंड को पैन्ट के ऊपर से ही रगड़ने लगीं। मैंने उनकी तरफ मुँह किया तो उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए.. और मुझे किस करने लगीं। इसके बाद उन्होंने मेरे पैन्ट की चैन खोलकर लंड को बाहर निकाल लिया। अब वो मेरे लौड़े की मुठ मारने लगीं।

फिर उन्होंने अपना सिर नीचे ले जाकर लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगीं।
भाभी मुझे मुँह से चोद रही थीं।
इतने में मेरा होने वाला था.. तो मैंने भाभी को कहा- मैं आने वाला हूँ।
वो और ज़ोर से लौड़ा चूसने लगीं। कुछ ही देर में लंड ने अपने पानी को भाभी के मुँह में भर दिया। वो पूरा माल पी गईं।

अब मैंने उनके चूचे दबाने शुरू किए। फिर उनके कुर्ते को ऊपर किया और मम्मों को जोर से दबाने लगा, भाभी ने ब्रा तो पहनी ही नहीं थी।
फिर मैंने एक चूचे को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। उनके दूसरे चूचे को भी मैं दबाए जा रहा था।

अब मैं एक हाथ नीचे भाभी की चूत पर लेकर गया.. तो उनकी चूत तो पूरी गीली हो गई थी। जैसे पानी का कोई सैलाब आया हो। उनकी चूत पर हाथ फेरा तो एकदम साफ़ चिकनी थी शायद आज ही बाल साफ़ किए थे।

चूत चुदाई को बेताब भाभी

अब मैं भाभी को उंगली से चोद रहा था पर अब वो कहने लगीं- अब और सहन नहीं होता.. मुझे चोद दो।

हम घर चलने को रेडी हुए अपने कपड़े ठीक किए और निकल गए। घर जाते ही दरवाजा बन्द किया और भाभी मुझ पर टूट पड़ीं। वो इतनी चुदासी थीं जैसे कोई भूखी बिल्ली अपने खाने पर टूट पड़ी हो।

कमरे में आते ही हम दोनों ने एक-दूसरे को नंगा किया और किस करने लगे। किस करते समय वो मेरे लंड को पकड़ कर मसल रही थीं और मैं उनकी चूत में उंगली कर रहा था। कुछ देर के बाद हम दोनों 69 में आ गए, मैं उनकी चूत चाट रहा था और वो लंड चूस रही थीं।

फिर भाभी ने कहा- अब मेरे अन्दर डाल दो।

मैंने उन्हें लिटाया और अपने लंड पर कन्डोम लगाने को कहा।

भाभी ने अपने हाथों से लंड पर कन्डोम लगाया, फिर मैं उनकी टाँगों के बीच में आ गया, उनके दोनों पैर ऊपर उठा कर मैंने लंड को चूत पर टिका कर धक्का दिया.. तो मेरा आधा लंड अन्दर घुसता चला गया।

भाभी की चीख भरी सीत्कार निकली ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ लेकिन मैंने एक और झटका लगा दिया और पूरा लौड़ा भाभी की चूत में घुसेड़ दिया था।

अब मैंने धीरे धीरे भाभी को चोदना शुरू किया, उन्हें भी मजा आने लगा, मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी।
अब मैं उन्हें ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था। भाभी भी मज़े लेकर चुदवा रही थीं और नीचे से अपनी गांड उठा-उठा कर मेरे हर धक्के का जवाब दे रही थीं।

फिर मैंने उन्हें घोड़ी बनाकर चोदा और कुछ देर के बाद मैं चित्त लेट गया और वो मेरे ऊपर आकर अपनी चूत चुदवाने लगीं।

थोड़ी देर बाद मैंने कहा- मैं आने वाला हूँ।
तो वो नीचे लेट गईं.. मैं उनके ऊपर आकर उन्हें चोदने लगा। बस 15-20 धक्कों के बाद मैं झड़ गया। इस लम्बी चुदाई में वो भी झड़ गई थीं और वो बहुत खुश थीं।

उस रात मैंने उन्हें कई बार हर स्टाइल में चोदा और उनकी गांड भी मारी।
आपको मेरी सेक्स स्टोरी कैसी लगी.. ज़रूर बताइएगा।



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