चाची की चूत की चाहत
बात उस वक्त की है जब मैं 18 साल का था। मैं उस उम्र के सभी लड़कों की तरह ठरकी था, हमेशा सेक्स के ताक में रेहता था। लेकिन उस वक्त तक मैंने सेक्स का अनुभव नहीं किया था। उन दिनों लड़के लड़कियां आपस में इतने खुले नहीं होते थे, जीतने आज कल होते हैं। मैं तो debonair जैसी मैगज़ीन देख कर मुठ मार के गुज़ारा कर लेता था। उसके इलावा आस पास वाली लड़कियों और औरतों को देख कर अपनी आखें तर कर लिया करता। उनके उभारों को दिमाग में कैद कर के बाद में उनके बारे मे सोच कर अपने लौड़े से खेल के अपनी प्यास बुझा लेता। जैसा की आम होता है, सबसे ज्यादा अपने परिवार की औरतों से ही पाला पड़ता था, तो ज़्यादातर वो ही मेरी कल्पनाओं की पात्र होती – चाचियां, मामियाँ, आंटी वगैरह।
उन सब में मेरी चहेती थी गुड्डू चाची। वो मेरे सबसे छोटे चाचा की बीवी थी, और उस समय तकरीबन 30 – 35 साल की थी। जब उनकी शादी हुई थी तब मैं पाँच छह साल का रहा हूंगा। मैं तब से ही उन का दीवाना था। उस समय मुझे सेक्स की तो कोई समझ नहीं थी, लेकिन मैं ये जानता था की मुझे चाची बहुत अच्छी लगती थी। वो जब हमारे घर आती, तो मैं अक्सर उनकी गोदी में बैठ जाता, या उस में सर रख देता। मुझे वो बहुत प्यार करती और चूमती, जिस मे मुझे बहुत मज़ा आता था। जैसे जैसे मैं बड़ा हुआ, और मेरा लोड़ा खिलने लगा, चाची की तरफ मेरी नज़र भी बदल गयी। अब मैं उनके जिस्म को करीब से देखने लग गया। उनको देख कर मेरा ल्ंड खड़ा हो जाता। मैं जब भी चाची से मिलता, नज़रों से उनके कपड़े उतारने की कोशिश करता। चाची अक्सर साड़ी काफी नीचे बांधती थी, जिस से उनका पेट और नाभि साफ दिखती थी। उनका हल्का सा मोटा पेट, और गहरी नाभि देख कर मेरा ल्ंड खड़ा हो जाता था। वो सारी काफी टाइट बांधती थी, जिस से उनके चूत्तर मस्त दिखते थे। ब्लाउज़ भी टाइट और गहरे गले वाला पहनती थी। मैं उनके बड़े बड़े सुडौल मम्मों और गोल गोल नर्म नर्म मोटे चुत्तर देख कर मस्त हो जाता। कई बार साफ पता चलता था की चाची ने साड़ी के नीचे कच्छी नहीं पहनी है, और उनकी चुत्तरों के दोनों भाग अलग अलग हरकत करते, और उनकी सारी चुत्तरों की दरार में फस जाती। मैं सोचता की चाची का जिस्म नंगा कैसा दिखता होगा। कित्नी रातें मैंने चाची के नाम मुठ मार के गुज़ारी उनका कोई हिसाब नहीं।
कई बार उनके घर पे बाथरूम में अगर मुझे उनकी पहनी हुई कच्छी मिल जाती तो मैं उसका वो वाला हिस्सा जो उनकी चूत को ढकता है, उसको खूब सूँघता और उस पर अपनी ज़ुबान फेरता। कई बार, जब चाची ने कच्छी अभी अभी उतारी होती, तो खास तौर से वो हिस्सा गीला और सुगंधित होता। मैं उनकी कच्छी में मूठ मारता और अपना पानी उस से पोंछ लेता।
इस सब के बावजूद मैं आगे कुछ नहीं कर पाया था। यों समझिए की आगे कुछ कर पाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाया था। चाची के व्यवहार से मैं पता नहीं लगा सकता था की अगर मैं पहल करूँ तो उनकी प्रतिक्रिया कैसी होगी। मेरी तो यही सोच के फट जाती की अगर मैंने कुछ करने की कोशिश करी और चाची तैयार न हुई, तो क्या होगा। वो मेरी शिकायत कर देगी और मेरी तो लग जाएगी। यही सोच मैं अपनी उत्तेजना को काबू में कर लेता।
फिर आखिरकार मुझे जिस मौके की तलाश थी वो मिल गया। मेरे cousin की शादी थी और हम सब बारात में गए थे। सर्दियों के दिन थे, और फेरे बहुत देर रात को थे। ज़्यादातर मेहमान खाना खा कर चले गए थे, और फेरों तक सिर्फ कुछ नजदीकी रिश्तेदार ही बचे थे। ठंड ज्यादा होने की वजह से मंडप के आस पास रज़ाइयो का इंतेजाम किया गया था, और सब लोग इन्हे ओढ़ के बैठे थे। मैं चाची की रज़ाई मे उनके साथ जा कर बैठ गया। मेरा दिल ज़ोर से धडक रहा था, मेरे मन मे लड्डू फूट रहे थे। सोच रहा था की शायद सालों की ख्वाइश आज पूरी हो जाएगी। डर भी बहुत लग रहा था।
थोड़ी देर रज़ाई में बैठने के बाद मैं अंदर ही खिसक के चाची से बिलकुल पास बैठ गया। धीरे धीरे मैंने अपने हाथ चाची के पैर पे रख दिये, और उसका एक पैर हल्के हल्के सहलाने लगा। जब मैंने देखा की चाची ने पैर पीछे नहीं किया और कुछ बोला भी नहीं तो मेरी हिम्मत थोड़ी सी बढ़ी। धीरे धीरे मैं अपना हाथ थोड़ा सा ऊपर ले गया और उसकी पिंडली को सहलाने लगा। फिर कुछ देर बाद मेरे हाथ उसकी जंघों की ओर बढ़ गए। मेरी साँसे तेज चल रही थीं और मेरा लंड मेरे उंडेर्वेयर में तना हुआ था। चाची ऐसे ज़ाहिर कर रही थी की कुछ हो ही नहीं रहा। आस पास बाकी लोग भी बैठे थे और मुझे ये सोच कर और भी ठरक चड़ रही थी की मैं सब के बीच बैठ के चाची की जांघों पे हाथ फेर रहा हूँ, और ये सोच कर भी की इस बात पे वो भी कुछ नहीं कह रही।
अब मैंने अपने आप को थोड़ा सा adjust किया और फिर ऊँघने की acting करने लगा। ऐसे मैंने ये सोच के किया की यदि किसी समय भी चाची भड़क जाए तो मैं ऐसे जाहीर करूंगा की मैंने नींद मे गलती से ऐसा किया। लेकिन आग तो बराबर दोनों तरफ लगी हुई थी। अब सोने की एक्टिंग करते करते मैं चाची की जांघों को अच्छे से मसलने लगा। क्या मुलायम जांघे थी उसकी, बिलकुल मक्खन। चाची भी बिलकुल पूरी तरह से मेरा साथ दे रही थी। उसने अपनी टाँगे खोल ली थी, और रज़ाई के नीचे उसकी साड़ी उसकी कमर तक उठी हुई थी। मैं अपने मन की आँखों से रज़ाई के नीचे उसकी उठी हुई साड़ी और उसकी नंगी टाँगे देख रहा था और बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रहा था। अब मेरे दोनों हाथ रज़ाई के अंदर थे, एक से चाची की जांघे सहला रहा था और दूसरे से अपना लंड।
अब मुझ से रहा नहीं गया और मैंने अपना हाथ और ऊपर बढ़ा कर उसकी टाँगो के बीच मे रख दिया। उसने साड़ी के नीचे कच्छी पहनी हुई थी। मैंने अपना हाथ उसकी कच्छी के ऊपर से उसकी चूत पे रखा तो कच्छी और चूत के बीच कुछ कठोर सी चीज़ पायी। असल में चाची की माहवारी चल रही थी और उसने पैड लगा रखा था। मुझे थोड़ा सा KLPD का एहसास हुआ, लेकिन मेरे लिए तो किसी चूत के इतने करीब पहुचने का यह पहला अवसर था, और वो भी मेरी चाची की चूत जिसके बारे में मैंने सोच कर कितनी बार मूठ मारी थी। और चाची भी कोई आपत्ति नहीं कर रही थी, बल्कि मेरा पूरा साथ दे रही थी। तो किसी बात की परवाह किए बिना मैं पैड और कच्छी के ऊपर से ही उसकी बुर को सहलाता रहा।
थोड़ी देर बाद चाची ने एक हाथ रज़ाई के अंदर कर के मेरे हाथ को अपनी भोंसडी पे दबा दिया। उसके हाथ का स्पर्श ने तो मुझे पागल कर दिया और मेरा पानी छूट गया। मेरा कच्चा मेरे पानी से गीला हो गया। तभी चाची ने अपनी टाँगे ज़ोर से भींच ली और फिर वो ढीली पड़ गयी। मैं समझ गया की वो भी चर्म सीमा पे पहुँच गयी। फिर उसने धीरे से मेरा हाथ अपनी टाँगो के बीच से हटाया और अपनी साड़ी नीचे कर ली। इस पूरे समय मे हमारे बीच एक शब्द भी नहीं बोला गया था। बल्कि हमारी आखें भी आपस में नहीं मिली थी। लेकिन एक बात मेरे समझ में आ गयी थी। मेरी चाची की चूत मे खुजली थी, जिसे मैं मिटा सकता था, और अपने लंड की प्यास भी उसकी मदद से शांत कर सकता था।
तड़के विदाई हो गई, और अगले दिन हम बाकी रस्मों के लिए बुआ के घर पे आए। मैं चाची को आते देख थोड़ा सकपका गया, लेकिन चाची नें मुझे देख कर मंद से मुस्कुराया और बोली, “कल शादी में बहुत मज़ा आया।“ आस पास काफी लोग थे, लेकिन चाची की बात का असली मतलब तो सिर्फ वो और मैं ही समझ रहे थे। बाद में जाते जाते चाची ने मुझ से बोला – “ये क्या हम लोग ब्याह शादी पे ही मिलते हैं एक ही शहर मे रहते हुए। कभी घर आओ ना।“
मैं उनका न्योता और उसके पीछे की भावना अच्छी तरह समझ रहा था, और मेरा लंड खड़ा हो रहा था। मैंने ठान लिया की जल्द ही मैं उनके घर जाकर अधूरा काम पूरा करूंगा। लेकिन वो कहानी फिर। अगर आपको मेरी यह कहानी पसंद आई तो मुझे मेल करे। भाभियाँ, आँटी, दीदी जो अपनी चूत की खुजली मिटाना चाहती हैं, या सिर्फ मेरे से गरमा गरम चैट करना चाहती हैं भी मुझे मैसेज कर सकती हैं। मुझे इंतज़ार रहेगा।



Read More Related Stories
Thread:Views:
  विधवा चाची की चुदाई 5,481
  जवान चाची का कमाल 6,104
  चाची का कमाल 39,552
  चाची को चोदने का मज़ा 37,899
  चाची का दीवाना 19,035
  चाची की चुदाई से शुभारम्भ 212,552
  रेखा चाची का बेटा 20,629
  चाची की भावनाएँ 16,089
Bug मेरी प्यारी कान्ता चाची 21,154
Question चस्का चाची का 18,167
 
Return to Top indiansexstories